अमर उजाला संवाद में उठाई मथुरा के विकास की मांग
- फोटो : अमर उजाला
एडवोकेट कमलकांड उपमन्यु ने कहा कि जिले में महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के स्थलों के विकास पर ध्यान नहीं दिया गया। विकास के नाम पर करोड़ों रुपये आते हैं, लेकिन जिले में कहीं विकास दिखाई नहीं देता। मथुरा में चार धाम हैं, लेकिन इन धामों के क्षेत्र में विकास नहीं है।
होटल कारोबारी अमित जैन ने कहा कि विश्वविख्यात मथुरा के विकास के प्रति हमेशा से लापरवाही बरती गई है। यातायात व्यवस्था से लेकर बिजली, पानी, सड़क तक पर ध्यान नहीं दिया गया। यहां तक कि श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र यमुना से गंदगी साफ नहीं हो सकी। विकास के लिए योजना बनानी चाहिए।
समाजसेवी अनुज गर्ग ने कहा कि शहर की जानीमानी शिक्षण संस्थाएं मैनेजमेंट के आपसी विवाद में बर्बाद हो रही हैं। इन संस्थाओं को बचाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। बिजली, पानी, सड़क, सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए। 84 कोस के परिक्रमा मार्ग का विकास होना चाहिए।
समाजसेवी कुंवर नरेंद्र सिंह ने कहा कि मथुरा के विकास के लिए इस शहर को एनसीआर में शामिल किया जाना चाहिए। मथुरा शहर को धार्मिक स्थल घोषित करें, जिससे यहां का चहुंमुखी विकास हो सके। सीवर डालने के नाम पर शहर को खोद कर डाल दिया है। विकास कार्य में प्रशासन की प्लानिंग दिखाई नहीं देती।
मंदिर के सेवायत महेश भारद्वाज ने कहा कि वृंदावन की गलियों में रातभर अंधेरा रहता है। स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी रहती हैं। ऐसे में बंदरों का आतंक भी है। बंदर सामान छीनकर ले जाते हैं। दुनियाभर के श्रद्धालु यहां आते हैं। अधिकारियों को भी इन समस्याओं की जानकारी है, लेकिन सुनवाई नहीं होती।
समाजसेवी कपिल उपाध्याय ने कहा कि वृंदावन मंदिरों की नगरी है। यहां अधिकांश लोगों की आजीविका का साधन दुनियाभर से आने वाले श्रद्धालु हैं। इन दिनों मंदिर बंद हैं, श्रद्धालु नहीं आ रहे हैं। ऐसे में पूरे वृंदावन में रोजाना लॉकडाउन के हालात बने हुए हैं। लोगों की आय के साधन बंद हैं। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।
समाजसेवी सुरेश शर्मा ने कहा कि बांकेबिहारी मंदिर की परिक्रमा करने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं। परिक्रमा मार्ग में भवनों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में परिक्रमा करने के लिए स्थान का अभाव हो जाता है। परिक्रमा मार्ग और वृंदावन की गलियों में गंदगी का अंबार लग जाता है, इससे श्रद्धालु आहत होते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता पवन गौतम ने कहा कि शहर के विकास के लिए संबंधित विभागों में तालमेल दिखाई नहीं देता। सीवर, बिजली, पेयजल आदि के नाम पर एक ही सड़क कई-कई बार खोदी जाती है। इस पर बेवजह धन भी खर्च होता है। अधिकारी तालमेल से विकास कार्य कराएं तो लोगों को परेशानी नहीं होगी।