हिंदी हैं हम: अंजू गोयल, डॉ.निर्मला यादव, संध्या दुबे (क्रमश:)
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भले ही आज के अभिभावक अपने बच्चों को हिंदी माध्यम से पढ़ाने कतराते हो, लेकिन हिंदी सम्मान की भाषा है। फिरोजाबाद जिले में हिंदी विषय से जुड़े लोगों ने अपनी अलग ही पहचान बनाई है। हिंदी विषय की बदौलत सफल लोग भी कहते हैं कि हिंदी को अनिवार्य किया जाना चाहिए। लोगों को आवश्यकता है कि मातृ भाषा हिंदी का सम्मान करें।
'हिंदी को बढ़ावा देने के लिए कर रहे कार्य'
दाऊदयाल महाविद्यालय में हिंदी विषय की अध्यापिका अंजू गोयल ने कहा कि हिंदी भाषा समाज में सम्मान दिलाती है। मैं अध्यापिका हूं, यहां भी सम्मान है। मैने समाज में अपनी पहचान बनाने के लिए काव्य क्षेत्र में अपना कदम बढ़ाया है। ताकि युवा पीढ़ी हिंदी के क्षेत्र में आगे आए और मातृ भाषा को बढ़ावा मिले। मैने हिंदी की किताबें लिखना शुरू की है। मुझे साहित्य संस्था द्वारा भी कई बार सम्मान मिल चुका है।
'तीन किताबों का किया है प्रकाशन, हिंदी में कराए हैं सेमिनार'
महात्मा गांधी महिला महाविद्यालय में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. संध्या दुबे हिंदी को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर राष्ट्रीय सेमिनार भी करातीं हैं। इसमें युवाओं के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ती हैं। साथ ही संध्या दुबे ने तीन किताबों का प्रकाशन भी किया है और तीन आना शेष हैं। वह कहती हैं कि हिंदी स्वयं ही सम्मान की भाषा है। इसे सीबीएसई, आईसीएसई में भी अनिवार्य करना चाहिए।