#हिंदीहैंहम: संवाद में वक्ताओं ने रखे विचार
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भारत को आजाद हुए सात दशक से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अभी तक भारतीय अपनी राष्ट्रीय भाषा का चयन नहीं कर सके हैं। सरकार भी संवैधानिक तौर पर हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित नहीं कर पाई है। लेकिन धीरे-धीरे ही सही विश्व में हिंदी का सम्मान बढ़ रहा है। इसी के मद्देनजर अमर उजाला द्वारा हिंदी के सम्मान के लिए मुहिम चलाई जा रही है।
- संसार की सब भाषाएं जब बनने लगे शूल, मेरे प्यारे भारतवासियों तब गर्व से कहो हमारी हिंदी भाषा सभी भाषाओं की है मूल। विश्व की प्राचीनतम भाषा संस्कृत से जन्म लेने वाली हिंदी आसान भाषा है। जिसे हर आदमी आसानी से समझ लेता है। हिंदी सभी भाषाओं में सरल वैज्ञानिक तथ्य पर आधारित है। हिंदी के हर शब्द में अनेकों शब्द छुपे रहते हैं।
- राम जोशी, प्रधानाध्यापक।
- हिंदी भाषा के रूप का वर्णन किया जाए तो कुछ इस तरीके से शब्द बनकर निकलेंगे। हिंदी रस और छंद विराजे उनमें शीष अलंकृत शोभा न्यारी, स्वर-व्यंजन सुन्दर दो नयनामस्तक बिंदिया संज्ञा प्यारी। तत्सम रूप लगै अति पावन तद्भव में अपनापन भारी। कारक-क्रिया बने संबंधी और संस्कृत है महतारी। हिंदी हिन्दुस्तान का गौरव है।
- हरीकान्त शर्मा, प्रधान अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुखराई।