हिंदीहैंहमः व्हाट्सएप पर हुए संवाद में वक्ताओं ने रखे विचार
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हिंदी का विस्तार दिन प्रतिदिन हो रहा है। अर्थशास्त्र पढ़ाने वाले प्रोफेसर को हिंदी से इतना लगाव हुआ कि कई रचनाएं, उपन्यास के साथ कहानियां लिख डालीं। मध्य प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार ने भी उन्हें सम्मानित किया।
आज भी हिंदी की अलख जगाने का काम कर रहे हैं। वह कहते हैं कि हिंदी की रचनात्मकता और उसके शब्दों का भाव ही सब कुछ कह जाता है। अमर उजाला द्वारा व्हाट्सएप पर हुए संवाद में हिंदी के जानकारों ने अपनी राय रखी।
अर्थशास्त्र से एमए एवं एमकॉम करने वाले जीवाजी यूनीवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रवक्ता रहे मितावली निवासी पुन्नी सिंह को सही पहचान हिंदी ने दिलाई। हिंदी से उन्हें इतना लगाव रहा कि उन्होंने आठ कहानी संग्रह लिखे जो प्रकाशित हुए। चार उपन्यास लिखे और एक नाटक लिखा। मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद की ओर से सम्मानित किए जाने के साथ उत्तर प्रदेश सरकार ने साहित्य अकादमी का पुरस्कार से सम्मानित किया था। पुन्नी सिंह कहते हैं कि हिंदी वह भाषा है जिसका हर मंच पर सम्मान होता है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों में हिंदी का सम्मान बढ़ा है।