अमर उजाला फाउंडेशन की टीम बुधवार को जब हाथ-पैरों से दिव्यांग अफजल मजीद के ईदगाह की एक तंग गली में स्थित घर पहुंची तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। टीम ने बैटरी ट्राईसाइकिल भेंट की तो मानो अफजल को पैर ही मिल गए, वह उछलकर सीट पर बैठ गए। उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे। बोले कि अब घिसटकर स्कूल और दुकान तक नहीं जाना होगा।
घिसटकर जाना पड़ रहा था स्कूल तक
ईदगाह की बस्ती में रहने वाले अफजल मजीद ने अमर उजाला फाउंडेशन को पत्र लिखकर ट्राईसाइकिल दिलाने की गुहार लगाई थी। अफजल के पिता रोहता नहर के पास पंक्चर जोड़कर परिवार चलाते हैं। वह पुश्तैनी एक कमरे के घर में रहते हैं। जन्म से ही अफजल के दोनों हाथ और पैरों में विकलांगता है। इस कारण वह पैदल बमुश्किल चल पाते हैं। उनको घिसटकर स्कूल तक जाना पड़ रहा था।
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अब नहीं होगी दिक्कत
अफजल ने बताया कि अब उनको दिक्कत नहीं आएगी। वह इस पर अपने छोटे भाई को भी बैठा सकेंगे। फाउंडेशन ने उनकी मुश्किलें हल कर दीं। अमर उजाला फाउंडेशन ने कानपुर के भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण लिमिटेड से ट्राईसाइकिल खरीदकर भेंट की है।