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अमर उजाला स्थापना दिवस विशेष: जनसरोकार वाली पत्रकारिता से जीता लोगों का भरोसा...बनाई हर मन में पैठ

Mon, 18 Apr 2022 01:09 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

अमर उजाला अपने गौरवशाली 75वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। यह महोत्सव पाठकों के विश्वास है, जो 74 वर्षों से लगातार कायम है। अमर उजाला ने इन वर्षों ने जनसरोकार वाली पत्रकारिता से हर मन में अपनी जगह बनाई है। 
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अमर उजाला 75वां स्थापना दिवस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमर उजाला सिर्फ सूचनाओं का पुलिंदा नहीं, जन सरोकार की प्रखर मशाल भी है। अमर उजाला फाउंडेशन के तहत जरूरतमंद लोगों की मदद की जाती है। उन्हें जिंदगी जीने का हौसला मिलता है और बेहतर भविष्य की उम्मीद भी कायम होती है।

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ब्लड डोनेशन कैम्प: साल भर विभिन्न खास मौकों पर आगरा सहित अलग-अलग संस्करणों में ब्लड डोनेशन कैम्प लगाए जाते हैं। यह रक्त जिला अस्पतालों के ब्लड बैंकों में इकट्ठा कराया जाता है, जहां से जरूरतमंद को मुहैया कराते हैं।

दिव्यांग छात्रवृत्तिः श्री डोरीलाल अग्रवाल राष्ट्रीय मेधावी दिव्यांग छात्रवृति शारीरिक रूप से अक्षम, मूक बधिर, दृष्टिहीन और मानसिक रूप से दिव्यांग छात्र-छात्राओं को दी जाती है ताकि वे अपनी पढ़ाई सुचारु रख सकें। कितने ही बच्चे हैं जिनके सपने इस छात्रवृति के जरिए साकार हुए हैं। कई बच्चे नौकरी करके अब दूसरों को सहारा दे रहे हैं।
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पुलिस की पाठशाला: अमर उजाला फाउंडेशन के तहत स्कूली छात्राओं की सुरक्षा और उनमें आत्मविश्वास जगाने के लिए 'पुलिस की पाठशाला' कार्यशाला की जाती है। इसका आयोजन समय-समय पर सभी संस्करणों के विभिन्न स्कूलों में किया जाता है। इसमें एसएसपी रैंक के बड़े अफसर छात्राओं के सुरक्षा संबंधी सवालों के जवाब देते हैं। साथ ही उन्हें सुरक्षा के गुर भी सिखाए जाते हैं।

अपराजिता क्लब: अमर उजाला फाउंडेशन के तहत ही विभिन्न शहरों में अपराजिता क्लब चलाए जाते हैं। इनमें कई ऐसी गतिविधियां संचालित की जाती हैं, जिनसे महिलाओं में आत्मनिर्भरता की भावना और आत्म-विश्वास जाग्रत होता है। महिलाओं की प्रतिभा को मंच प्रदान किया जाता है। ब्यूरो

जरूरतमंदों की मदद

कोरोना महामारी के भीषण दौर में फाउंडेशन के जरिए कई जरूरतमंदों के लिए भोजन, राशन, कंबल, सैनिटाइजर और मास्क का अनेक बार वितरण करवाया गया। एसएन मेडिकल कॉलेज को वेंटिलेटर और पीपीई किट प्रदान की गईं। इसी कड़ी में कई स्थानों पर निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों के आयोजन कराए गए।

अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से कई जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक मदद भी दिलवाई गई। मथुरा में एक बुजुर्ग अम्मा, जो कैंसर से पीडित थीं, के ऑपरेशन की पूरी जिम्मेदारी ली गई। इसी तरह हाल ही में आगरा के चार वर्षीय थैलेसीमिया पीडित वेद गर्ग के मेरो ट्रांसप्लांट के लिए करीब 17 लाख रुपए इकट्ठा किए गए।
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साहित्य सेवा में भी शिखर पर

अमर उजाला हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए कृत संकल्पित है। हिंदी पर गर्व करते हुए लाखों पाठकों को इस दिशा में सतत जागरूक किया है और यह सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में साहित्य का, साहित्य के लिए, साहित्य को समर्पित शब्द साधना अलंकरण स्थापित किया और नवांकुर साहित्यकारों को देने की पहल शुरू की गई। इसमें सतत रचनात्मकता के लिए एक हिंदी और एक अन्य भारतीय भाषा में विशिष्ट सृजन के लिए पांच-पांच लाख नकद रुपये के दो सर्वोच्च अलंकरण ‘आकाशदीप’ दिए जाते हैं। 

इसके अलावा हिंदी में किसी लेखक की पहली किताब के लिए ‘थाप’ अलंकरण दिया जाता है। इसमें सम्मान स्वरूप एक लाख रुपये की राशि दी जाती है। इसी तरह तीन साहित्यकारों को ‘छाप’ अलंकरण के तहत हिंदी में तीन विधाओं में तीन कृतियों पर एक-एक लाख रुपये सम्मान स्वरूप प्रदान किए जाते हैं। भारतीय भाषाओं में अनुवाद के लिए विशेष सम्मान ‘भाषा बंधु’ दिया जाता है। इसके तहत एक लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है।
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