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अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति से सहारा ही नहीं छात्रों को हौसला भी मिला, ऐसे करें आवदेन

Mon, 02 Sep 2019 11:39 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति - फोटो : अमर उजाला
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अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति न सिर्फ जरूरतमंद विद्यार्थियों का सहारा बनी बल्कि उन्हें आगे बढ़ने का हौसला भी मिला है। अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा-2018 में उत्तीर्ण अनुज सहारिया आईएएस बनना चाहते हैं। अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा में सफल होने के बाद इनके अंदर एक नई ऊर्जा का संचालन हुआ है। 
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मथुरा के केशवपुर राणा निवासी अनुज सहारिया गरीब परिवार से हैं। पिता योगेंद्र कुमार खेती करते हैं। महज चार बीघा खेती की जमीन है। अनुज कुल पांच भाई-बहन हैं। सभी पढ़ाई कर रहे हैं। पिता जैसे-तैसे परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। 

अनुज सहारिया ने जब अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा का फार्म भरा था तो वह कक्षा दस में थे। पहले विश्वास नहीं था कि वह परीक्षा उत्तीर्ण कर पाएंगे। अनुज का कहना है कि परीक्षा में सफलता पाने के बाद हौसले को पंख लग गए। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने से आर्थिक रूप से भी बड़ी मदद मिली है। यह गांव के बच्चों के लिए रोल मॉडल भी बन गए। इनसे विद्यार्थी अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा के बारे में पूछ रहे हैं।
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छात्रवृत्ति पाकर खुद पर भरोसा बढ़ा: दीपेंद्र 

अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा-2017 में सफलता पाने के बाद दिगरौता, खेरागढ़ निवासी दीपेंद्र कुंतल का खुद पर भरोसा बढ़ गया है। मन में सेना का अधिकारी बनने की इच्छा जागी। एनडीए की तैयारी में जुट गए। टेस्ट भी पास कर लिया। दो सितंबर से सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) का साक्षात्कार मैसूर में होना है। 

परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद दीपेंद्र कुंतल आसपास के विद्यार्थियों के लिए रोड मॉडल बन गए। विद्यालय में इनका उदाहरण दिया जाने लगा। दीपेंद्र खुद भी छात्र-छात्राओं को अमर उजाला की छात्रवृत्ति परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं। दीपेंद्र ने बताया कि अब उनके बड़े भाई को नेवी में तैनाती मिल गई है। 

जिस समय दीपेंद्र को छात्रवृत्ति मिली थी, परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। तीनों भाई-बहन पढ़ाई कर रहे थे। पिता योगेंद्र सिंह खेती करके बच्चों को पढ़ा रहे थे। इनके पास महज तीन बीघा खेती की जमीन है। 50 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिलने से परिवार पर पढ़ाई का बोझ कम हुआ। सैकड़ों छात्रों के बीच से चुने जाने पर भी गर्व महसूस हुआ। 
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छात्रवृत्ति से पढ़ाई खर्च की नहीं रहती थी चिंता

जिला कृषि अधिकारी डॉ. रामप्रवेश वर्मा मानते हैं कि उनकी पढ़ाई में छात्रवृत्ति का विशेष योगदान है। इसके सहयोग से उच्च शिक्षा आसान हो गई। बोले कि एमएससी और पीएचडी के वक्त छात्रवृत्ति मिली। इस धनराशि से पढ़ाई का खर्च आसानी से निकल आता था। 

इससे कभी पढ़ाई खर्च के लिए चिंतित नहीं रहना पड़ा। मेरे साथ कई ऐसे मेधावी रहे कि छात्रवृत्ति नहीं मिलती तो उच्च शिक्षा नहीं प्राप्त कर सकते थे। बोले कि छात्रवृत्ति ऐसी पूंजी है जो मेधावियों के सपनों को पंख देती है। 

8 सितंबर तक कर सकते हैं आवदेन
अमर उजाला फाउंडेशन ने अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा-2019 के फॉर्म भरने की अंतिम तिथि (31 अगस्त, 2019) को आठ दिन बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब प्रादेशिक बोर्डों के नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थी 8 सितंबर (रविवार) तक फॉर्म भर सकते हैं। 

फाउंडेशन की वेबसाइट foundation.amarujala.com या अमर उजाला की वेबसाइट amarujala.com या फिर  https://www.amarujala.com/atul-maheshwari-chhatravritti-2019 पर जाकर फॉर्म भरा जा सकता है।

फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियां देना अनिवार्य होगा। लिखित परीक्षा के लिए विद्यार्थी अपनी सुविधानुसार शहर का चयन कर सकेंगे। इसके लिए 52 शहरों का विकल्प दिया गया है। परीक्षा केंद्र की सूचना ई-मेल द्वारा भेजे जाने वाले एडमिट कार्ड में दी जाएगी। इसलिए हर आवेदक का ई-मेल आईडी होना अनिवार्य है। 
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