कासगंज के हिम्मतपुर सई में एक खेत में तैयार होती आलू की अगैती फसल
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कासगंज। जिले की शीतगृहों में सिर्फ 30 हजार क्विंटल आलू ही बचा है। बाजार में आलू की अच्छी कीमत के चलते किसान शीतगृहों से आलू की निकासी तेजी से कर रहे हैं। प्रतिदिन दो हजार क्विंटल की खपत के हिसाब से अब 15 दिन के लिए ही आलू शेष है।
आलू की नई फसल 15 नवंबर के बाद आनी तो शुरू हो जाती है, लेकिन इसकी मात्रा काफी कम रहती है। इसलिए शीतगृहों में भंडारित आलू की आवश्यकता दिसंबर तक के लिए होती है, लेकिन इस बार आलू की पैदावार कम होने से भंडार पर्याप्त मात्रा में नहीं हो सका है। 15 फरवरी से 20 मार्च तक ही आलू का भंडार हो सका है। भंडार से जो आलू शेष बच गया, उसे अप्रैल की ही खपत की पूर्ति हो सकी है।
अब बाजार में उपयोग के लिए मात्र 30 हजार क्विंटल आलू ही बचा है। जिसके 15 दिन में खपत होने का अनुमान है। वैसे तो हल्द्वानी आलू की आवक शुरू हो गई है, लेकिन इसकी आवक भी अभी काफी कम है। इससे स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा। शीतगृह संचालक मुकेश शर्मा ने बताया कि किसानों ने शीतगृहों से आलू की अधिकतर निकासी कर ली है। अब लगभग 30 हजार क्विंटल आलू ही स्टॉक में बचे हैं। जिसका 15 दिन की खपत का अनुमान है।