अक्षय तृतीया पर सोने के बाजार की खोई रौनक फिर लौटने की उम्मीद है। ज्वेलरी की नई डिजायनों को अक्षय तृतीया के लिए ही पेश किया गया है। मान्यता है कि सोने की खरीद इस दिन शुभ होती है। हालांकि इस साल अक्षय तृतीया के बाद सहालग न होने से सराफा बाजार में चिंता जरूर है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि डेढ़ महीने की बंदी के बाद बाजार में रौनक लौट आएगी।
सोने के बेहद हल्के आभूषणों की बड़ी रेंज को बाजार में केवल अक्षय तृतीया के लिए ही उतारा गया है। बाजार का ट्रेंड भी बता रहा है कि अक्षय तृतीया पर सोने की खरीद सराफा व्यापारियों के चेहरे खिला सकती है। एक फीसदी एक्साइज लगने से पहले 24 कैरेट सोने के भाव जहां 26 हजार रुपये प्रति दस ग्राम पर थे, वहीं शुक्रवार को यह 30,100 रुपये पर पहुंच गए। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने के भाव में इजाफा होता रहेगा। ऐसे में निवेशकों का भी मोह सोने की ओर हो सकता है। श्री सराफा कमेटी के महासचिव देवेंद्र गोयल ने बताया कि बाजार रफ्तार पकड़ रहा है।
अक्षय तृतीया से ही आभूषण निर्माताओं की उम्मीदें टिकी हैं। सोने का भाव भी बढ़ रहा है, ऐसे में ग्राहक अच्छी खरीद कर सकते हैं। सहालग नहीं होने से जरूर कुछ कमी आ सकती है, लेकिन उम्मीदें बहुत लगा रखी हैं
राजेश हेमदेव, अध्यक्ष, ज्वेलर्स एसोसिएशन, आगरा
डेढ़ महीने की बंदी के बाद बाजार में रौनक नहीं आ पाई है, लेकिन अक्षय तृतीया शायद बाजार के सन्नाटे को तोड़ दे।
पवन दौनेरिया
अध्यक्ष सराफा मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन
मार्च में सराफा बंद, लेकिन वैट जमा
आगरा। केंद्र सरकार द्वारा बजट में सोने, हीरे के आभूषणों पर एक फीसदी एक्साइज ड्यूटी लगाए जाने के विरोध में सराफा व्यापारियों ने पूरे मार्च और अप्रैल में 12 दिन तक प्रतिष्ठान बंद रखे। इस दौरान बड़े आभूषण निर्माताओं ने चोरी-छिपे कारोबार जारी रखा और प्रतिष्ठानों पर ताले दिखाकर अंदर काम कराते रहे। कईयों ने कारीगरों से काम भी कराया। ऐसे आरोपों को वाणिज्य कर विभाग के वैट जमा होने के आंकड़ों ने ताकत दी है। मार्च में वाणिज्य कर विभाग को बुलियन पर 1.11 करोड़ रुपये वैट मिला, जबकि पिछले साल मार्च में यह 6.58 करोड़ रुपये जमा हुआ था। इस तरह इसमें 83 फीसदी की कमी आई। बीते साल बुलियन से 32.67 करोड़ रुपये का वैट मिला था, लेकिन 2015-16 में यह 17 फीसदी घटकर 26.88 करोड़ रह गया।