उत्तर प्रदेश के एटा जिले से समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव को बृहस्पतिवार को मथुरा के जैत थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया। मथुरा पुलिस के सहयोग से कोतवाली नगर पुलिस और जिले की क्राइम ब्रांच टीम गिरफ्तार कर दोपहर के समय एटा लाई। यहां से अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया। वर्तमान में उनकी पत्नी रेखा यादव जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।
25 हजार रुपये का था इनाम घोषित
एसएसपी उदय शंकर सिंह ने बताया कि फरार चले रहे जुगेंद्र सिंह यादव को जिला मथुरा स्थित जैत मोड़ के पास से सुबह 10.15 बजे गिरफ्तार किया गया। कोतवाली अलीगंज में दर्ज घर में घुसकर पिटाई, छेड़छाड़ व हत्या के प्रयास के मुकदमे में 25 हजार रुपये इनाम घोषित किया गया था, जबकि अलीगंज में अपनी और अपने परिजनों की हिस्ट्रीशीट गायब करने का मामला दर्ज है। बागवाला थाना क्षेत्र में वर्ष 2017 में चुनाव प्रभावित करने के प्रयास का मामला दर्ज है। जिसमें अदालत से उनके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी है। इन तीनों मामलों में वह वांछित चल रहे थे। एसएसपी ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद मेडिकल कॉलेज में जुगेंद्र सिंह का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। इसके बाद अदालत में पेश किया गया। वहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस दौरान कोतवाली नगर से लेकर मेडिकल कॉलेज और जेल तक जिले भर का पुलिस बल लगाया गया।
अखिलेश के करीबी माने जाते हैं जुगेंद्र सिंह
जुगेंद्र सिंह समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं। साल 2017 और 2022 में उन्होंने एटा विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था। इससे पहले उनके बड़े भाई रामेश्वर सिंह को भी पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। रामेश्वर सिंह भी सपा से विधायक रहे हैं।
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बड़े भाई की पूर्व में हो चुकी है गिरफ्तारी
बता दें 18 अप्रैल को उन पर तथा उनके बड़े भाई पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव पर कोतवाली नगर में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। तबसे दोनों फरार चल रहे थे। 30 मई को दोनों पर कुर्की कार्रवाई के लिए न्यायालय ने नोटिस जारी किए थे, जिन्हें उनके प्रतिष्ठानों पर चस्पा किया गया। हालांकि इसके बाद भी वह हाजिर नहीं हुए। पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव को पुलिस ने 9 जून को आगरा के सिकंदरा थानांतर्गत सेक्टर 10 आवास विकास कॉलोनी से गिरफ्तार कर लिया। वह जेल में हैं, जबकि जुगेंद्र सिंह फरार थे, जिन्हें पुलिस ने होली के अगले दिन गिरफ्तार कर लिया।
पंचायत चुनाव से पहले शुरू हुई थी कानूनी कार्रवाई
बता दें जिला पंचायत चुनाव से पहले ही सपा के पूर्व विधायक और उनके भाई पूर्व जिपं अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई थी, जबकि प्रदेश में भाजपा की सरकार दोबारा बनने के बाद उन पर शिकंजा कस दिया गया। जमीनों पर अवैध रूप से कब्जे करने के कई मुकदमे उनके खिलाफ लिखे गए। गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में रामेश्वर सिंह को गैंग लीडर और जुगेंद्र सिंह को गिरोह का सक्रिय सदस्य दर्शाया गया था।
फिर पुलिस ने दिखाई सख्ती
इसके बाद से दोनों सपा नेताओं के ठिकानों पर पुलिस की दबिश का सिलसिला शुरू हो गया। लेकिन दोनों नेता न तो गिरफ्तार हुए और न ही अदालत में ही हाजिर हुए। इसे लेकर 31 मई को गैंगस्टर अधिनियम न्यायालय से उनके विरुद्ध धारा 82 के तहत कुर्की कार्रवाई के नोटिस जारी कर दिए गए। जो दोनों नेताओं के एटा और जैथरा स्थित आवास व प्रतिष्ठानों पर नोटिस चस्पा कराए गए। 9 जून को पुलिस ने रामेश्वर सिंह को आगरा से गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद कोर्ट में उनकी पेशी हुई। यहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था।