पर्यटन नगरी आगरा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए ताजनगरी एक बार फिर हाथ मलती रह गई। उड्डयन विभाग के जेवर में हवाई अड्डे को मंजूरी के बाद आगरावासी अब सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकारें बार-बार आगरा में एयरपोर्ट का वादा कर जाती हैं लेकिन इसकी मांग अब तक पूरी नहीं हुई है।
बता दें कि जेवर के साथ ही आगरा में भी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को लेकर दावे किए गए थे। लेकिन यहां तो सिविल टर्मिनल का प्रस्ताव भी हवा में लटका है। सपा के बाद भाजपा सरकार में भी जमीन अधिग्रहण के लिए बजट जारी नहीं हो पाया है। ताजमहल सहित तीन विश्वदाय स्मारकों को सहेजने वाला आगरा का पर्यटन जगत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की मांग कर रहा है।
विधानसभा चुनाव से पहले पिछले साल तत्कालीन प्रदेश और केंद्र सरकार ने इसे लेकर खूब दावे भी किए। पहले सिविल टर्मिनल को मंजूरी दे दी। इसके लिए जून 2016 में जमीन अधिग्रहण का कार्य शुरू कर दिया गया। अक्तूबर तक 23 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत भी हो गई। इसी बीच चुनावी माहौल के बीच केंद्र और राज्य सरकारों ने आगरा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए दावे किए।
आगरा में सिविल टर्मिनल को ही विस्तार रूप देकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने पर केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच सहमति बन गई। मगर, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तो दूर सिविल टर्मिनल के लिए भी बजट खत्म होने पर पिछले साल अक्तूबर से जमीन अधिग्रहण का काम भी रुक गया। तब भाजपा नेताओं ने प्रदेश में सरकार बनने के बाद इसे पूरा करने के दावे किए। लेकिन अब तक कुछ नहीं हो पाया है।
अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. रामशंकर कठेरिया ने आयोग का अध्यक्ष बनने से पहले पिछले महीने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर बीस दिन में सिविल टर्मिनल के लिए शेष 14 हेक्टेयर जमीन के लिए 64.94 करोड़ रुपये जारी कराने का दावा किया था। यह अभी भी हवा में लटका है। कठेरिया आगरा के सांसद भी हैं।