आगरा से इटावा लायन सफारी तक साइकिल हाईवे बनाकर प्रदेश सरकार ने रिकॉर्ड कायम कर लिया है लेकिन पिछले 30 साल से चली आ रही ताजनगरी में इंटरनेशनल एयरपोर्ट की मांग पूरी नहीं हो सकी है। यह स्थिति तब है, जबकि केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहमति के बाद दोनों ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी देकर क्रेडिट लेने की होड़ मच गई थी। इंटरनेशनल एयरपोर्ट तो दूर अभी तक सिविल एन्क्लेव के लिए भी राज्य सरकार जमीन का बंदोबस्त नहीं कर पाई है।
ताजनगरी में इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए सितंबर में केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहमति बन गई थी। इसके बाद इस प्रोजेक्ट को मूर्त रूप प्रदान करने के लिए अचानक तेजी आ गई। पहले चरण में सिविल एन्क्लेव के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू हो गया। मगर, कुछ ही दिनों में बजट खत्म हो गया। इसी के साथ सारी कवायद ठंडी पड़ गई।
प्रशासन ने शासन से आगे की कार्रवाई के लिए 64 करोड़ रुपये की मांग की। वहीं, अक्तूबर में ही प्रशासन ने इंटरनेशनल एयरपोर्ट का प्रस्ताव भी शासन को मंजूरी के लिए भेज दिया। मगर, दो महीने बाद भी न तो सिविल एन्क्लेव के लिए जमीन अधिग्रहण को बजट ही मिल सका है और न ही इंटरनेशनल एयरपोर्ट का प्रस्ताव पास हुआ है। ऐसे में शहर के लोग मुख्यमंत्री से सिर्फ यही पूछ रहे कि सीएम साहब साइकिल हाईवे तो दे दिया, इंटरनेशनल एयरपोर्ट कब मिलेगा।
कब तक मिलेगा गंगाजल
शहर में पेयजल की भीषण किल्लत है। वर्ष के चार महीने तो जनता बूंद-बूंद पानी को तरस जाती है। अन्य दिनों में दूषित पानी पीकर लोग बीमार हो रहे हैं। 2012 से जनता को गंगाजल का सपना दिखाया जा रहा है लेकिन अब तब गंगाजल प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका है। 2887 करोड़ रुपये की इस योजना के संबंध में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वर्ष 2016 के अंत तक गंगाजल की आपूर्ति की भरोसा दिलाया था लेकिन अब तक 2016 भी बीतने वाली है लेकिन पाइप लाइन का काम भी पूरा नहीं हुआ है। जल निगम के अधिकारी मार्च 2017 की तारीख दे रहे हैं लेकिन जिस गति से काम चल रहा है उसे देखकर नहीं लगता है मार्च 2017 तक जनता को पेयजल की किल्लत से निजात मिल पाएगी।