54 साल के बाद बुधवार को आगरा में हवाई हमले का अभ्यास हुआ और सायरन गूंजा। पाकिस्तान के साथ मौजूदा हालात देखते हुए स्कूलों समेत जगह-जगह अभ्यास किया गया। ऐसा ही मॉक ड्रिल 54 साल पहले आगरा के लोगों ने अनुभव किया था, जब 1971 के युद्ध से पहले जिला प्रशासन ने 21 से 23 सितंबर 1971 के बीच दो दिन तक हवाई हमलों से बचाव के लिए लोगों को प्रशिक्षित किया था। तब रात में ब्लैक आउट के साथ वाहनों का संचालन भी बंद करा दिया गया था।
अमर उजाला आर्काइव के पन्नों में 54 साल पहले का ब्लैक आउट दर्ज है। 21 सितंबर 1971 की रात 12 बजे से सुबह 5:30 बजे तक और 22-23 सितंबर की रात 7:45 बजे से सुबह 5:30 बजे तक पूरे शहर में अंधकार कर दिया गया था। तत्कालीन डीएम प्रताप सिंह के आदेश पर चले अभ्यास में सड़कों, घरों, दुकानों की लाइटें इस अवधि में बंद करा दी गई थीं। कांपती हुई आवाज में कृत्रिम हवाई हमलों की सूचना लोगों को दी गई थी।
रात में उन वाहनों का संचालन बंद करा दिया गया था, जिनकी हेडलाइट दो तिहाई काली नहीं की गई थीं। शहर के छात्रों, लोगों ने काले पेंट से वाहनों की हेडलाइट को दो तिहाई काला कर दिया था ताकि उनकी रोशनी ऊपर तक न जाए। इसके बाद वर्ष 1971 में ही युद्ध के दौरान 3 से 15 दिसंबर के बीच घरों की लाइटें रात में बंद कराई गई थीं।