धूल-धुआं और बढ़ता प्रदूषण लोगों को बीमार बना रहा है। आंखों में जलन-नाक में खुजली और सीने में जकड़न कर रहा है। अस्थमा-सांस रोगियों की तो हालत खराब है। गंभीर हालत में मरीज इमरजेंसी में भर्ती हो रहे हैं।
वक्ष एवं क्षय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि सोमवार को हाफ डे की ओपीडी में 231 मरीज इलाज कराने आए। 70 फीसदी ने सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न, खांसी बंद न होने की परेशानी बताई। इनमें करीब 40 फीसदी पुराने मरीज हैं। सात मरीज भर्ती करने पड़े, जिनको ऑक्सीजन दी जा रही है। प्रदूषित कण सांस नलिकाओं में पहुंचने से संक्रमण हुआ। अस्थमा अटैक के दो मरीज भी इमरजेंसी में भर्ती हुए हैं।
ईएनटी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रीतू गुप्ता ने बताया घर से अधिकांश समय बाहर रहने वाले लोगों में नाक की एलर्जी, गले में खराश और जुकाम की शिकायत मिल रहा है। दूषित कण नाक में जाने से बार-बार छींक आ रही है। नाक से पानी आ रहा है। गले में और नाक से पानी गिर रहा है। खुजली, जलन और गले में खराश हो रही है। बार-बार छींकें भी आ रही हैं। इससे मरीजों में चिड़चिड़ापन भी हो रहा है।
आंखों में खुजली, करकराहट और जलन
एसएन के नेत्ररोग विभागाध्यक्ष डॉ. स्निग्धा सेन ने बताया कि बीते दो सप्ताह से प्रदूषण बढ़ने से आंखों के मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। आंखों में जलन, खुजली, पानी आने की परेशानी मिल रही है। कार्बन कण जाने से करकराहट हो रही है। आंखों को रगड़ने से जख्म भी बन रहे हैं। इनमें बच्चों की संख्या अधिक है।
इन बातों का रखें ध्यान:
घर की सफाई करते वक्त मास्क से मुंह ढक लें।
खिड़की-दरवाजे बंद रखें, कूड़े को न जलाएं।
प्रदूषित स्थानों पर जाने से बचें, मास्क लगाकर जाएं।
आंखों में जलन-खुजली होने पर साफ पानी से धोएं।
सीने में जकड़न पर सुबह-शाम भाप लें।