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UP: पढ़ाई में किया AI का इस्तेमाल...अब इस समस्या से जूझ रहे छात्र, डाॅक्टर के लगाने पड़ रहे चक्कर

Mon, 05 Jan 2026 03:02 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

एआई यानी आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। छात्र अब पढ़ाई में भी इसका उपयोग कर रहे हैं। कठिन सवालों को पलक झपकते ही एआई से हल कर लेते हैं। लेकिन अब यही छात्रों के लिए सबसे बड़ी दिक्कत बन गया है। उन्हें चिकित्सकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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गणित के सवाल, भौतिक-रसायन के समीकरण या रीजनिंग। पहली बार में हल नहीं कर सके तो झट से आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद ली और सवाल सॉल्व। कुछ घंटों बाद दोबारा हल करने बैठे तो फिर वही हाल। एआई पर निर्भर होकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी ऐसी स्थिति से जूझ रहे हैं। बोर्ड परीक्षा की तैयारी प्रभावित होने से तनाव में आए छात्र-छात्राएं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेने पहुंच रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि याददाश्त के लिए मस्तिष्क में कई न्यूरोट्रांसमीटर हैं। इनमें एसिटाइलकोलाइन हार्मोंस सीखने, याददाश्त, ध्यान और मांसपेशियां को नियंत्रित करता है। डोपामाइन अच्छा महसूस कराने वाला और प्रेरक, एकाग्रता और याददाश्त को मजबूत करता है। स्वयं किसी सवाल को हल करने पर हार्माेंस तेजी से सक्रिय होते हैं। इससे दिमाग में लंबे समय तक स्मरण रहता है।
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बिना प्रयास किए एआई से हल कराने पर तत्काल समझ में तो आता है लेकिन दिमाग में वह स्टोरेज नहीं होता। अभ्यास, लिखना-पढ़ना कम कर एआई पर निर्भर रहने से याददाश्त पर सीधा असर पड़ रहा है। इससे चंद घंटों में भूलने आधे-अधूरे याद रहने की समस्या बढ़ रही है। बोर्ड परीक्षा की तैयारियों में जुटे ऐसे विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है। टेलीमानस पर भी इसी तरह के रोजाना 10-15 कॉल आ रहे हैं। इनमें से अधिकांश की वजह यही है। सभी को लिखकर पढ़ने और अभ्यास पर जोर देने के लिए कहा जा रहा है।

मानसिक परेशानी हो तो 14416 मिलाएं
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में टेलीमानस सेवा संचालित है। टोल फ्री नंबर 14416 पर फोन करने पर मानसिक परेशानियों का विशेषज्ञ फोन पर ही समाधान करते हैं। ये 24 घंटे सेवा संचालित रहती है। मानसिक परेशानियों से जूझ रहा कोई भी व्यक्ति इस नंबर पर फोन कर लाभ प्राप्त कर सकता है।
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गणित विषय के ज्यादा आ रहे छात्र
एसएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभागाध्यक्ष प्रो. विशाल सिन्हा ने बताया कि ओपीडी में रोजाना 3-5 बच्चे अभिभावकों के साथ आ रहे हैं। पूछताछ में पता चला कि एआई पर निर्भर होकर पढ़ाई करने वाली विषयों में ज्यादा दिक्कत मिल रही है। खासतौर से गणित, रीजनिंग, भौतिक-रसायन विज्ञान के हैं। शिक्षक के पढ़ाते वक्त ध्यान नहीं दिया, सोच लिया एआई से पूछ लेंगे। खुद बिना किसी प्रयास किए एआई से हल करवा लिए। बाद में याद नहीं आया, या पूरा हल नहीं कर पाए। इससे वे तनाव में भी आ रहे हैं। इनकी काउंसलिंग भी की जा रही है।

कुछ दिन बाद नहीं रहता याद
कमला नगर में 12वीं का एक छात्र एआई और चैटजीपीटी से पढ़ाई करता और सिलेबस भी पूरा कर लेता था। कुछ घंटे या फिर एक-दो दिन बाद दोबारा पढ़ने पर वो याद नहीं आता। इससे तनाव में आ गया, विशेषज्ञों को दिखाने पर काउंसलिंग की गई।

 
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तनाव में आ गया छात्र
खंदारी निवासी अभिभावक ने डॉक्टर को बताया कि उनका बेटा हाईस्कूल में है और पढ़ने की कहते तो नेट ऑन कर मोबाइल से पढ़ाई शुरू कर देता है। मना करने पर भी नहीं मानता, जब दोबारा उसी को पढ़ता तो याद नहीं आता, इससे वह तनाव में आ गया है।

इन बातों का रखें ख्याल
- लिखकर पढ़ने और अभ्यास करना न छोड़ें, हल करने के लिए खुद ही प्रयास करें।
- शिक्षक के पढ़ाते वक्त गंभीरता रखें, समझ में न आने पर शिक्षक से पूछें।
- एआई, चैटजीपीटी का बेहतरी के लिए उपयोग करें, इन पर पूरी तरह से निर्भर न हों।
- खुद सवाल हल करें, फिर एआई से पूछें। मिलान करें, कमी होने पर बेहतर बनाएं।
- बोर्ड परीक्षा के दौरान खेलकूद, पेंटिंग समेत अन्य शौक बंद न करें। समय सीमित कर लें।

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