आगरा। आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई) आपकी पसंदीदा सामग्री को चिह्नित कर दिमाग नियंत्रित कर रहा है। इंटरनेट के अत्यधिक उपयोग से एआई अरेस्ट की स्थिति बन रही है। इसमें व्यवधान पड़ने पर बच्चे तो हिंसक जैसा व्यवहार करने लग रहे हैं। कई बार वे खुद या फिर सामने वाले की जान जोखिम में डाल सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि इंटरनेट पर पसंदीदा कंटेंट को एआई तत्काल चिह्नित कर उससे जुड़े हुए कंटेंट बार-बार परोसने लगता है। लोगों को लगता है कि वे इंटरनेट चला रहे हैं, हकीकत में आपका दिमाग एआई के नियंत्रण में आ गया है। जैसे स्वादिष्ट भोजन करने, व्यायाम करने, नृत्य करने या फिर किसी तरह के लाभ होने पर डोपामिन हार्मोंस का स्राव होने से खुशी मिलती है।
ऐसे ही अन्य किसी के मुकाबले पसंदीदा कंटेंट देखने से डोपामिन तेजी से स्राव होने लगता है। इससे उसे सबसे ज्यादा खुशी महसूस होती है। परिजन की टोकाटाकी से बच्चे चिड़चिड़े और गुस्सैल होने लगे हैं।
कटेंट से होने लगते हैं सम्मोहित
एसएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. केसी गुरनानी ने बताया कि जब किसी भी सामग्री को लगातार देखा जाए तो उसके प्रति सम्मोहन जगने लगता है। काल्पनिक पात्रों को हकीकत मानकर उससे अत्यधिक स्नेह और भरोसा करने लगते हैं। जब कोई इसमें बाधा बनता है तो उसे वह बर्दाश्त नहीं होता है। इसके चलते कई बार आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।
अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान
- माता-पिता मोबाइल व इंटरनेट का सीमित, जरूरी होने पर ही उपयोग करें।
- बच्चों को मोबाइल, इंटरनेट और एआई के दुष्प्रभाव भी बताएं।
- मोबाइल-लेपटॉप का चार्जर पॉइंट से बेड, कुर्सी-मेज को दूर रखें।
- मोबाइल-लेपटॉप के बजाय डेस्कटॉप इस्तेमाल करें। सार्वजनिक स्थान पर रखें।
- एक दिन इंटरनेट फ्री तय करें। स्कूल ऑनलाइन कार्य देने से बचें।