06एमएनपी-13-बारिश के चलते खेतों में बिछी गेहूं की फसल
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मैनपुरी। मार्च में हुई बैमौसम बारिश ने जिले में बीते दस सालों में हुई बारिश का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इसके कारण फसलों में इस बार नुकसान की संभावना और भी प्रबल हो गई है। बीते दस वर्षों की अगर बात करें तो कई वर्षों में तो मार्च में बारिश का आंकड़ा शून्य ही रहा। जिला प्रशासन ने बारिश की रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
होली से ठीक पहले बदला मौसम किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। बारिश ने किसानों की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। वहीं बारिश के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। मार्च में हुई बारिश ने बीते दस सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अब तक कभी भी मार्च में इतनी बारिश नहीं हुई। मार्च 2020 में अब तक 45 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। इसमें एक मार्च को 11 मिमी, पांच मार्च को 25 मिमी और छह मार्च को लगभग नौ मिमी से अधिक बारिश हुई। सबसे अधिक बारिश भोगांव तहसील में 59 मिमी दर्ज की गई। वहीं अभी मौसम साफ न होने से बारिश की आशंका बनी हुई है।
15 से 20 प्रतिशत नुकसान का आंकलन
अब तक बारिश होने पर तीन बार कृषि विभाग द्वारा गेहूं व सरसों की फसल में नुकसान का आंकलन कराया जा चुका है। शनिवार को तैयार कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार गेहूं की फसल में जहां 15 से 20 प्रतिशत नुकसान हुआ है तो वहीं सरसों में 25 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। वहीं जलभराव वाले क्षेत्रों में ये आंकड़ा पांच प्रतिशत तक और बढ़ जाएगा। हालांकि वास्तविक स्थिति फसलों की कटाई के बाद ही साफ हो सकेगी।
दस वर्षों के दौरान मार्च में हुई बारिश के आंकड़े
वर्ष 2011 06 मिमी
वर्ष 2012 शून्य
वर्ष 2013 शून्य
वर्ष 2014 14.79 मिमी
वर्ष 2015 27.25 मिमी
वर्ष 2016 शून्य
वर्ष 2017 9.13 मिमी
वर्ष 2018 शून्य
वर्ष 2019 6.40 मिमी
वर्ष 2020 45 मिमी
(नोट: मार्च 2015 का आंकड़ा सात मार्च तक का है।)