आगरा में वेतन भोगी समिति बनाकर एलआईसी कर्मचारियों का 25 करोड़ रुपया लेकर फरार हो जाने वाले चार आरोपियों में से दो ने मंगलवार को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
दोनों की पत्नियां भी इस मामले में आरोपी हैं, वे सरेंडर करने के लिए नहीं आई। वहीं दोनों के जेल पहुंच जाने के बाद भी पुलिस कहती रही कि सरेंडर की जानकारी नहीं है।
सरेंडर करने वाले आरोपियों में वेतन भोगी समिति का अध्यक्ष विष्णु अवतार और सचिव ब्रजपाल है। ब्रजपाल फ्रेंड्स विहार दयालबाग का रहने वाला है और विष्णु अवतार सेक्टर 11 आवास विकास का, इन दोनों की पत्नी भी आरोपी हैं।
इनके अतिरिक्त सात और कर्मचारियों के नाम आए। पुलिस ने किसी की भी गिरफ्तारी के लिए दबिश तक नहीं दी। फरार आरोपियों के वारंट लेने के लिए अर्जी तक नहीं दी गई।
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इन लोगों पर आरोप है कि पैसा जमा कराकर उस पर 11 फीसदी सालाना ब्याज का लालच देते थे। इनके जाल में 100 से अधिक लोग फंसे। उनके 50 हजार से 90 लाख तक जमा किए।
इस तरह लगभग 25 करोड़ रुपया हो जाने पर घरों पर ताले लगाकर भाग गए। पुलिस पहले इनके खिलाफ केस ही दर्ज करने के लिए तैयार नहीं थी।
बाद में अधिकारियों के निर्देश पर जैसे तैसे रिपोर्ट दर्ज की लेकिन गिरफ्तारी नहीं की। अब इनके रिमांड के लिए कोई अर्जी देने की तैयारी भी नहीं की गई है।
इन्होंने सीजेएम कोर्ट में सरेंडर किया। इनकी ओर से जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। इसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। दोनों को नौ जुलाई तक जेल भेज दिया गया।
हम कंगाल हो चुके, पैसा कहां से देंगे
आरोपियों के कोर्ट में सरेंडर का पता चलते ही पीड़ित भी कचहरी पहुंच गए। उन्होंने आरोपियों से कहा कि पैसा कहां गया? क्यों वापस नहीं कर रहे? इस पर एक आरोपी ने कहा कि हम कंगाल हो चुके हैं, पैसा कहां से चुकाएं।
जो पैसा था, वह लोन में दे दिया। उन्होंने यह भी कहा कि वे गिरफ्तारी के डर से भागे थे। एफआईआर होते ही जगह बदल बदलकर छिपे थे। पीड़ितों में आगरा, इटावा, फर्रुखाबाद, मैनपुरी, फिरोजाबाद समेत 13 जिलों के लोग हैं।