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UP: आगरा कोषागार का रिश्वतखोर लेखाकार गिरफ्तार, एंटी करप्शन की टीम ने रंगेहाथ दबोचा

Tue, 22 Apr 2025 03:04 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा कोषागार में एंटी करप्शन की टीम ने छापामार कार्रवाई करते हुए सहायक लेखाकार को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
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रिश्वत लेते गिरफ्तार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार दोपहर को कलेक्ट्रेट स्थित जिला कोषागार के सहायक लेखाकार प्रशांत कुमार को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि पेंशन के फिर से निर्धारण के लिए उसने रिश्वत मांगी थी। उसके खिलाफ थाना बमरौली कटारा में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में केस दर्ज किया गया है।
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एंटी करप्शन से के निरीक्षक सुबोध कुमार ने बताया कि उत्तराखंड निवासी राहुल चतुर्वेदी की मां कुमुद चतुर्वेदी को पारिवारिक पेंशन मिलती है। उनकी आयु 80 वर्ष हो चुकी है। 80 वर्ष के बाद 20 फीसदी वृद्धि के साथ ही पेंशन का फिर से निर्धारण किया जाता है। राहुल ने एंटी करप्शन सेल में शिकायत की थी कि वह परिवार के साथ उत्तराखंड में रहते हैं। मां काफी बुजुर्ग होने के कारण इतनी दूर आने-जाने में असमर्थ हैं। कोषागार का सहायक लेखाकार उनकी पेंशन का निर्धारण नहीं कर रहा है। कई बार चक्कर काटने के बाद उसने पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी है।

एंटी करप्शन की टीम ने छानबीन करने के बाद शिकायत सही पाई। इसके बाद मंगलवार दोपहर 12:30 बजे राहुल पांच हजार रुपये लेकर कोषागार पहुंचे। टीम ने जाल बिछाया हुआ था। सहायक लेखाकार प्रशांत ने जैसे ही नोट लिए। टीम ने उसे धर दबोचा। नोटों पर केमिकल लगा हुआ था। सहायक लेखाकार ने टीम के सदस्यों को धमकाया भी। सहायक लेखाकार के रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने के बाद कोषागार में खलबली मच गई। अन्य विभागीय कर्मचारी कुर्सियां छोड़कर इधर-उधर हो लिए। मामले में एंटी करप्शन की टीम ने थाना बमरौली कटारा में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया है। टीम में निरीक्षक संजय यादव शामिल रहे।
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हर बिल के भुगतान के लिए मांगी जाती है रिश्वत
विजिलेंस और एंटी करप्शन विभाग पर कोषागार और तहसील सदर की भ्रष्टाचार की सबसे ज्यादा शिकायतें आती हैं। विभागीय अफसरों ने बताया कि कोषागार में चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल, पेंशन के लिए खुलेआम रिश्वत मांगी जाती है। बाबू बिना पैसे के काम नहीं करते हैं। बुजुर्ग लोग कोषागार के चक्कर काटते हैं। कई तरह के बिलों के क्लीयरेंस के लिए कोषागार में पहले रिश्वत देनी पड़ती है। इसके बाद ही बिल पास हो पाते हैं। यहां तक कि कई विभागों के कर्मचारी भी अपने काम कराने के लिए कोषागार में रिश्वत देते हैं।

पूर्व में भी रिश्वत लेते पकड़े गए कर्मचारी
कई विभागों में रिश्वत लेने की शिकायतें हैं। पहले नंबर पर शिक्षा विभाग है। राजस्व और सिंचाई विभाग में भी कई कर्मचारी रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार हो चुके हैं। जनवरी, 2025 में एंटी करप्शन ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात लिपिक हर्ष शुक्ला को स्कूल की मान्यता के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए सेंट जोंस चाैराहे से गिरफ्तार किया था। अगस्त, 2024 में विजिलेंस टीम ने पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड-2 के सहायक अभियंता सुरजीत सिंह को सवा लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोप था कि सड़क निर्माण के बिल पास करने के एवज में वह रिश्वत मांग रहे थे। इसके अलावा भी कर्मचारी से लेकर अधिकारियों को काम के बदले रिश्वत लेते हुए विजिलेंस, एंटी करप्शन की टीमें गिरफ्तार कर चुकी हैं।
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