अंकल, प्लीज मुझे छोड़ दो। मैं आपके हाथ जोड़ती हूं, मुझे छोड़ दो। अंकल, अंकल, मैं शोर नहीं मचाऊंगी। प्लीज, मुझे जान से मत मारना....दम तोड़ने से पहले आठ साल की बालिका इसी तरह अपनी जान की भीख मांग रही थी।
उसने आरोपी छात्र हरीश के पांव भी पकड़ लिए थे लेकिन हरीश के सिर पर शैतान सवार था। वह शराब के नशे में धुत था। उसने रेप के बाद बच्ची की सलवार से ही उसका गला घोट दिया।
रोंगटे खड़े कर देने वाला यह पूरा घटनाक्रम खुद हरीश ने पुलिस पूछताछ में बताया है। जेल भेजने से पहले पुलिस ने उससे लंबी पूछताछ की। उसने बताया कि उसके पिता का सैलून सेंट जोंस चौराहे के पास में ही।
Jharkhand Police Gangrape
उसकी नजर बच्ची पर पहले भी पड़ी थी। वहां और भी कई बच्चियां थीं। 16 अप्रैल की रात शराब पीने के बाद उसके दिमाग में वहशियत आ गई। वह वहीं पहुंच गया। वहां से बच्ची को उठाया। वह रोने लगी, तो उसका मुंह दबा दिया।
कालेज के मैदान पर पहुंचते ही हाथ हटा दिया। अब बच्ची ने रोना बंद कर दिया था। बह धीरे धीरे सुबक रही थी। जब उसने उसके कपड़े उतारने शुरू किए तो वह जान की भीख मांगने लगी। रेप के दौरान उसने कई बार उसका मुंह दबाया।
इसके बाद बच्ची को लगा कि वह उसे मार देगा। उसने जान की भीख मांगनी शुरू कर दी। थाना प्रभारी निरीक्षक ने उससे हुई पूछताछ के हवाले से बताया कि उसे पहचान लिए जाने का डर था।
उसने कहा कि वह उस फुटपाथ के पास से होकर कई बार गुजर चुका था। उसे लग रहा था कि बच्ची उसे पहचानती होगी। इसी डर से उसकी हत्या कर दी।
पापा बचाओ, पापा बचाओ, पापा...
हरीश ने पुलिस को बताया कि उसने बच्ची की सलवार से ही उसका गला घोटा। वह पहले जान की भीख मांग रही थी। जब उसका गला घोंट दिया तो उसके मुंह से यही निकला, पापा बचाओ, पापा बचाओ।
इसके बाद आवाज आनी बंद हो गई। उसे लगा कि वह मर गई लेकिन वह वहां से गया नहीं। कहीं उसमें जान न बची हो, यह सोचकर वहीं बैठा रहा। पंद्रह मिनट बाद उसे यकीन हो गया कि बच्ची दम तोड़ चुकी है।
तब वह वहां से चला गया लेकिन घर नहीं गया। घर पास में ही है लेकिन जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। वह घर के पास गया लेकिन अंदर नहीं घुसा। आस पास घूमता रहा। वहीं से पुलिस ने पकड़ लिया।
ऐ जिंदगी! तू मुझे कितने गम देगी
सेंट जोंस चौराहा के पास फुटपाथ पर दीवार से सिर लगाए बैठे शख्स की आंखों से आंसू बह रहे हैं। वह खामोश बैठा है। उसी की आठ साल की बेटी की रेप के बाद हत्या की गई है। उसके पास 15-20 लोग और बैठे हैं।
सभी दरिंदगी के आरोपी को कोस रहे हैं, हम गरीबों ने किसी का क्या बिगाड़ा है, हम मेहनत करके पेट भरते हैं, फिर हमारी बच्ची के साथ ऐसा क्यों किया। तभी बच्ची का पिता बोलने लगता है, मेरा तो मुकद्दर ही फूटा हुआ है, पता नहीं जिंदगी कितने गम देगी।
मेरे छह बच्चे थे। पहले दो बेटियां बीमारी से दम तोड़ गई। अब एक की हत्या कर दी गई। पत्नी आठ महीने पहले नाराज होकर चली गई, फिर लौटी नहीं। मैं ही बच्चों की मां हूं, मैं ही पिता। बिटिया का गम मुझसे सहन नहीं हो रहा।