फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पढ़ें उस अफसर की कहानी, जिसके दफ्तर से फरियादी कभी निराश नहीं लौटे

Thu, 10 May 2018 05:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
विज्ञापन
महेश मिश्रा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
महेश मिश्रा दो नवंबर 2016 से 13 मई 2017 तक आगरा डीआईजी के पद पर तैनात रहे थे। उस समय रेंज का चार्ज डीआईजी के पास होता था। नई व्यवस्था में आईजी तैनात किए जाने लगे हैं। 
विज्ञापन


महेश मिश्रा की एक बात बिल्कुल निराली थी। वह थी फरियादियों को धैर्य से सुनने का तरीका और उनकी समस्या का समाधान होने तक उनसे फीडबैक लेते रहना। 

इसके लिए वह हर फरियादी को एक पोस्टकार्ड देते थे। उस पर उनके ऑफिस का पता लिखा होता था। फरियादी से कहते थे कि जांच में जो भी गड़बड़ हो, दरोगा सुनवाई न करे, पैसे मांगे, लेटलतीफी करे, सब इस पर लिख देना। 
विज्ञापन

फिर इसे पोस्ट कर देना। तरीका काम कर गया। रोजाना 25 से 30 पोस्टकार्ड आने लगे। पहले आगरा से शुरू हुआ। फिर रेंज के अन्य तीन जिलों मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी से भी चिट्ठी आने लगीं। 

लोग पुलिस की शिकायत लिखकर भेजते, कुछ में तारीफ भी आती। महेश मिश्रा वक्त निकालकर शाम को सभी पोस्टकार्ड को पढ़ते।जिनमें पुलिस की शिकायत रहतीं, उन्हें अलग कर लेते। 

इसके बाद उन सभी पुलिसकर्मियों की क्लास लगाते जिन पर आरोप लगे होते थे। तरकीब चल निकली। कई पुलिसकर्मी मुसीबत में आए, लेकिन पीड़ितों को बड़ी राहत मिली। 

महेश चंद मिश्रा इससे पहले जहां कप्तान रहे, वहां भी उनकी चिट्ठी खूब चली। वह पिछले साल सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अब मेरठ में रहते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें