महेश मिश्रा दो नवंबर 2016 से 13 मई 2017 तक आगरा डीआईजी के पद पर तैनात रहे थे। उस समय रेंज का चार्ज डीआईजी के पास होता था। नई व्यवस्था में आईजी तैनात किए जाने लगे हैं।
महेश मिश्रा की एक बात बिल्कुल निराली थी। वह थी फरियादियों को धैर्य से सुनने का तरीका और उनकी समस्या का समाधान होने तक उनसे फीडबैक लेते रहना।
इसके लिए वह हर फरियादी को एक पोस्टकार्ड देते थे। उस पर उनके ऑफिस का पता लिखा होता था। फरियादी से कहते थे कि जांच में जो भी गड़बड़ हो, दरोगा सुनवाई न करे, पैसे मांगे, लेटलतीफी करे, सब इस पर लिख देना।