आगरा में स्मार्ट सिटी योजना के तहत होने वाले कार्य ऐसे ही नहीं लटके। कंपनी के अधिकारियों के बीच लंबे समय से रार चली आ रही है। आगरा स्मार्ट सिटी लिमिटेड के चेयरमैन/मंडलायुक्त और सीईओ/नगर आयुक्त, जहां महाप्रबंधक की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं थे, वहीं महाप्रबंधक का कहना है कि अधिकारी उन पर अनावश्यक दबाव डाल रहे थे, इसके चलते उन्होंने गत 16 अगस्त को ही इस्तीफा दे दिया था। हालांकि यह इस्तीफा रिसीव नहीं हुआ था। इसलिए उन्होंने नगर आयुक्त को ई-मेल भी किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्मार्ट सिटी योजना में आगरा बमुश्किल से शामिल हो पाया था। वोटिंग के लिए शहरवासियों ने जहां जागरूकता अभियान चलाए थे। वहीं, विकास कार्यों के लिए सुझाव भी दिए थे। लंबी कवायद के बाद आगरा इसमें शामिल हो सका था। मगर, अधिकारियों ने कार्यों को अंजाम तक पहुंचाने में इतनी रुचि नहीं ली। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अब तक सिर्फ 130 करोड़ रुपये के कार्यों के ही टेंडर हुए हैं, जबकि 250 करोड़ रुपये के कार्यों के प्रस्ताव तैयार हैं। तमाम कार्यों के लिए विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं मिले हैं। ऐसे में अधिकांश कार्य लटके हुए हैं।
पिछले दिनों मंडलायुक्त द्वारा की गईं बैठकों में महाप्रबंधक के खिलाफ नाराजगी जताई थी। इसको लेकर उन्हें नोटिस दिए गए। कार्य में सुधार के लिए चेतावनी दी गई। इसके बावजूद स्मार्ट सिटी योजना के तहत होने वाले कार्यों में प्रगति नहीं हो सकी। इधर, महाप्रबंधक अनुराग राठौर का कहना है कि अधिकारी अनावश्यक दबाव बनाते थे, इसलिए उन्होंने गत 16 अगस्त को ही पद से इस्तीफा दे दिया था। मगर, नगर निगम कर्मचारियों ने इसे रिसीव नहीं किया। बताया कि ऐसी स्थिति में उन्होंने अपना इस्तीफा ई-मेल कर दिया था।