आगरा में लेखपाल की नौकरी पाने के लिए 24 साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का फर्जी पत्र तैयार करने के आरोपी इटावा के धारखा निवासी श्याम किशोर को सेशन कोर्ट से अपील में कोई राहत नहीं मिल सकी।
अपर जिला जज रीता सिंह ने अभियुक्त की दायर अपील खारिज कर अवर न्यायालय के फैसले को सही मानते हुए सजा बहाल रखी। इसके बाद अभियुक्त को जेल भेज दिया।
मामला वर्ष 1994 का है। छह मार्च 1994 को अभियुक्त श्याम किशोर तत्कालीन जिलाधिकारी देशदीपक वर्मा के पास एक टाइपशुदा प्रार्थनापत्र लेकर पहुंचे।
इसके नीचे हरी स्याही से पत्रांक संख्या 129 सेवा में, जिलाधिकारी महोदय, आगरा, आपके पास श्याम किशोर को भेज रहा हूं, जो आगरा में लेखपाल के पद रिक्त हैं, उसमें इस लड़के को नियुक्ति दिलाकर श्याम को आख्या प्रेषित करें।
इस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के हस्ताक्षर थे। जिलाधिकारी ने उक्त पत्र की जांच के बाद उसे फर्जी पाते हुए श्याम किशोर को गिरफ्तार कराकर ड्यूटी पर तैनात एचसीपी महीपाल को रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए।
इस पर महीपाल ने रकाबगंज थाने में धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज लगाने का मुकदमा दर्ज कराया। गत 24 अगस्त 1996 को केस में आरोप तय कर सुनवाई हुई।
सेशन कोर्ट में की थी अपील
करीब 18 साल बाद 28 अक्तूबर 2014 को अवर न्यायालय ने गवाह व सबूतों के आधार पर अभियुक्त को पांच साल के सश्रम कारावास और 300 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियुक्त ने उक्त निर्णय के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील की।
चार साल की सुनवाई के बाद सजा को बहाल रखा गया। एडीजीसी देवी सिंह सोलंकी ने कोर्ट में तत्कालीन डीएम देशदीपक वर्मा और एचसीपी रहे महीपाल के बयान कराए।