स्कूल छोड़ने वालों में अब लड़कों की संख्या चिंता बढ़ा रही है। सत्र 2025-26 में 9वीं से 12वीं तक के 5,410 विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ दी, जिसमें 3,230 लड़के हैं। इसके मुकाबले 2,180 लड़कियों ने ही स्कूल छोड़ा है। यानी लड़कियों की तुलना में 1,050 अधिक लड़के शिक्षा से दूर हुए हैं। किशोरावस्था के इस महत्वपूर्ण शैक्षिक चरण में लड़कों का बड़ी संख्या में स्कूल छोड़ना शिक्षा विभाग और समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
क्षेत्रवार आंकड़े देखें तो नगर क्षेत्र में सबसे ज्यादा 2,021 विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ी है। इसके बाद बरौली अहीर में 636 और अकोला में 363 विद्यार्थी स्कूल से बाहर हुए। आंकड़े यह भी बताते हैं कि ड्रॉपआउट की समस्या सिर्फ ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर में भी बड़ी संख्या में किशोर पढ़ाई छोड़ रहे हैं।
लड़कों को पढ़ाई से जोड़ना चुनौती
9वीं से 12वीं की पढ़ाई विद्यार्थियों के आगे के शैक्षिक और रोजगार के रास्ते खोलती है। इस स्तर पर पढ़ाई छूटने का असर आगे की शिक्षा पर पड़ सकता है। लड़कों के ड्रॉपआउट की संख्या अधिक होने के कारण उनके स्कूल छोड़ने की वजहों की अलग से पड़ताल जरूरी है। आर्थिक कारण, कामकाज, परिवार की जिम्मेदारी, पढ़ाई में रुचि की कमी या लगातार कमजोर प्रदर्शन जैसे कारण विद्यार्थियों को शिक्षा से दूर कर सकते हैं।- देवी सिंह नरवार, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ
शहर का आंकड़ा भी चिंता बढ़ाने वाला
माध्यमिक शैक्षिक महासंघ के कोषाध्यक्ष मुकेश शर्मा ने बताया कि आमतौर पर स्कूल छोड़ने की समस्या को ग्रामीण क्षेत्रों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन नगर क्षेत्र में 2,021 विद्यार्थियों का ड्रॉपआउट इस धारणा को बदलता है। शहर में भी किशोरों को स्कूल से जोड़े रखना चुनौती बना हुआ है। विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने से पहले उनकी पहचान, अभिभावकों से संपर्क और काउंसिलिंग जैसे कदमों पर जोर देने की जरूरत है।
आंकड़ों पर एक नजर
| श्रेणी |
विद्यार्थियों की संख्या |
| कुल ड्रॉपआउट |
5,410 |
| लड़के |
3,230 |
| लड़कियां |
2,180 |
| नगर क्षेत्र |
2,021 |
| बरौली अहीर |
636 |
| अकोला |
363 |
| अछनेरा |
300 |