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UP: जहां दिन में तीन बार रंग बदलता है शिवलिंग, उस प्राचीन राजेश्वर महादेव मंदिर की बदलेगी तस्वीर

Fri, 08 May 2026 01:33 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा के प्राचीन राजेश्वर महादेव मंदिर का 1.42 करोड़ रुपये से सौंदर्यीकरण किया जाएगा। परियोजना के तहत प्रवेश द्वार, फ्लोरिंग, पेयजल, बेंच और ड्रेनेज जैसी सुविधाएं विकसित होंगी, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा।
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राजेश्वर महादेव मंदिर, आगरा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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आगरा के राजपुर चुंगी स्थित प्राचीन राजेश्वर महादेव मंदिर में प्रदेश सरकार 1.42 करोड़ रुपये की लागत से काम कराएगी। इसमें मुख्य मार्ग पर भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण होने के साथ मंदिर परिसर में फ्लोरिंग और स्टोन क्लैडिंग का काम किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेंच, पानी की सुविधाएं होंगी तथा मंदिर परिसर में ड्रेनेज की व्यवस्था की जाएगी।
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राजेश्वर महादेव मंदिर शहर के चार प्रमुख शिवालयों में से एक माना जाता है। यहां सावन में और महाशिवरात्रि पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। सौंदर्यीकरण के तहत मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बेंच, दिशा-निर्देश के लिए साइनेज, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, विश्राम स्थल और बेहतर प्रकाश व्यवस्था की जा रही है, ताकि दर्शनार्थियों को कोई परेशानी न हो। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि राजेश्वर महादेव मंदिर का पर्यटन विकास क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देगा।

जो काम होंगे, उससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रदेश सरकार का उद्देश्य धार्मिक स्थलों को केवल आस्था तक सीमित न रखकर उन्हें स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से भी जोड़ना है। इससे स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प, छोटे व्यवसाय और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
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दिन में तीन बार रंग बदलता है शिवलिंग
राजेश्वर मंदिर के बारे में मान्यता है कि शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है। सुबह मंगला आरती के दौरान सफेद रंग, दोपहर की आरती के दौरान हल्का नीला और शाम की आरती के दौरान गुलाबी नजर आता है। 900 साल पुराने मंदिर की स्थापना के बारे मेंं किंवदंती प्रचलित है, जिसके अनुसार राजाखेड़ा निवासी सेठ नर्मदा नदी के पास से बैलगाड़ी से शिवलिंग स्थापित करने के लिए ले जा रहे थे। मंदिर के नजदीक ही एक कुआं था, आराम करने के दौरान सेठ को शिवजी ने स्वप्न दिया कि शिवलिंग को यहीं स्थापित कर दिया जाए। सेठ ने इसकी अनदेखी की और शिवलिंग को ले जाने की कोशिश करने लगे, लेकिन शिवलिंग वहीं स्थिर हो गया। तभी से यहां शिवलिंग स्थापित है।
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