दिल्ली में कार में हुए धमाके में आगरा के एक व्यक्ति घायल हुआ है। यहीं की काले रंग की स्कॉर्पियो कार भी धमाके में क्षतिग्रस्त हुई है। इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
आगरा में इसी तरह भगवान टॉकीज स्थित जय हॉस्पिटल में 14 साल पहले बम धमाके में 6 से अधिक लोग घायल हुए थे। एनएसजी कमांडो और राष्ट्रीय जांच एजेंसी सहित अन्य खुफिया एजेंसियों ने जांच की थी। मगर धमाका फाइलों में ही दबकर रह गया।
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बाईपास स्थित जय हॉस्पिटल में 17 सितंबर 2011 को बम धमाका हुआ था। धमाका इतना भीषण था कि 6 से अधिक लोग घायल हो गए थे। आतंकी घटना के मद्देनजर नजर खुफिया एजेंसियों ने जांच की थी। एनएसजी कमांडो और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी की टीम भी जांच करने के लिए पहुंची थी। इसमें हाईटेक तकनीक से धमाका किए जाने की पुष्टि हुई थी।
एक साल तक कई टीमों ने धमाके मामले में जांच की थी। इस मामले का खुलासा नहीं हो सका। पुलिस ने दो दिन बाद बम धमाके से संबंधित टुकड़े जांच के लिए भेजे थे। इसका नतीजा यह रहा कि आगे से संबंधित कोई भी सबूत पुलिस को नहीं मिल सका। मामले में 28 पर्चों के बाद पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।
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विशाल ढाबे पर 10 साल पहले रखा गया था टाइम बम
एत्माद्दौला के टेढ़ी बगिया स्थित विशाल ढाबे पर करीब 10 साल पहले टाइम बम रखा गया था। ढाबे पर दो लोग आए थे। उनके जाने के बाद कर्मचारियों की नजर थैले में रखे बम पर पड़ी थी। इसकी सूचना पुलिस को दी गई थी। एनर्जी कमांडो मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने बम को कब्जे में लिया था। इसके बाद बालू से भरे ट्रॉली में लेकर गए थे। बास्केट में रखे बम को निकाला गया था। उपकरणों के जरिये उसे खोलने का प्रयास किया जा रहा था, तभी उसमें धमाका हो गया था। उच्च तीव्रता का बम रखा गया था इससे कई लोगों की जान जा सकती थी। वह तो गनीमत रही कि समय रहते पता चल गया था। पुलिस ने दो संदिग्धों के स्केच भी जारी किए थे। इस घटना में भी बम रखने वालों का भी पता नहीं चल सका था।