आगरा में करीब 3500 किमी. लंबा सड़कों का जाल है। 400 से अधिक छोटी-बड़ी सड़कें हैं। पीडब्ल्यूडी ने वर्ष 2020 से 2025 तक पांच साल में 75 सड़कों के निर्माण, सुदृढ़ीकरण और रखरखाव पर करीब 112 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। लेकिन, धरातल पर हकीकत जुदा है। ग्वालियर रोड स्थित ककुआ चौराहा से कुबूलपुर होते हुए सीसिया नगला तक जाने वाली करीब तीन किमी. सड़क 10-10 फीट चौड़े और एक से डेढ़ फीट गहरे गड्ढे हैं। इस सड़क का निर्माण करीब 2 साल पहले हुए था। उधर, देवरी-इरादत नगर मार्ग भी जर्जर है। इसका निर्माण वर्ष 2021 में पीडब्ल्यूडी ने 27.82 करोड़ की लागत से कराया था। इसके आगे सिंगेचा से बाद तक सड़क टूटी पड़ी है। यह सड़क देवरी मार्ग को जोड़ती है। ऐसी 20 से अधिक सड़कें घटिया निर्माण सामग्री की भेंट चढ़ गईं।
जन प्रहरी संस्था संयोजक नरोत्तम सिंह शर्मा का कहना है कि पीडब्ल्यूडी में 30 से 40 प्रतिशत कमीशन चल रहा है। ठेकेदार और इंजीनियर साठगांठ कर जनता की टैक्स की कमाई को लूट रहे हैं। सड़कों की थर्ड पार्टी से जांच कराई जाए। पांच साल में जो सड़क टूट गईं, उनके लिए जिम्मेदार ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर होनी चाहिए। उधर, ट्रांसपोर्ट एजेंसी संचालक मनोज कुमार का कहना है कि ट्रांसपोर्ट नगर में नगर निगम ने तीन साल पहले 5 करोड़ से मरम्मत व सुदृढ़ीकरण कराया था। एक बरसात में सड़कें टूट गई। अब गहरे गड्ढे हो गए हैं। कोई सुनवाई नहीं हो रही। यही, हाल मॉडल रोड का है।
इन सड़कों से निकलना मुश्किल
- ककुआ चौराहा से कुबूलपुर होते हुए सीसिया नगला तक 3 किमी. सड़क जर्जर।
- ग्वालियर रोड स्थित बाद से सिंगेचा और देवरी मार्ग तक 7 किमी. सड़क में गड्ढे।
- इटौरा गांव से मंदिर तक करीब एक किमी. सड़क तीन साल से टूटी पड़ी है।
- रोहता नहर से गढ़ी ठाकुरदास तक करीब 1 किमी. सड़क दो साल से गड्ढों में तब्दील।
- दक्षिणी बाईपास से जारुआ कटरा गांव तक करीब 2 किमी. सड़क पर गहरे गड्ढे हैं।
- जगनेर रोड पर खाल-खलुआ गांव तक करीब 2 किमी. सड़क एक साल से टूटी पड़ी है।
सड़कों का होगा सर्वे
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी क्षतिग्रस्त सड़कों का सर्वे कराया जाएगा। गुणवत्ता खराब मिली तो ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी अधिकारी जिम्मेदार होंगे। इनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखेंगे।