जुलूस-ए-मोहम्मदी शाही जामा मस्जिद से शुरू होकर घाटी मामू भांजा, मंटोला, सदर भट्टी, नाई की मंडी, ढाकरान चौराहे से होता हुआ शाही जामा मस्जिद पर समाप्त हुआ। अध्यक्ष ने बताया कि आज ही के दिन मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था। जिसे हर मुसलमान बड़े ही अदब एवं जश्न के साथ मनाता है।
लंगर भी तकसीम किया गया। शहर के मुस्लिम इलाके शहीद नगर, ताजगंज, आगरा कैंट, मुस्तफा क्वार्टर, यमुनापार, नई बस्ती, बालूगंज, लोहामंडी, पाय चौकी, अबुल उला दरगाह आदि स्थानों से जुलूस शाही जामा मस्जिद पर एकत्रित हुए। छीपीटोला, मेवाती का नगला, रुई की मंडी शाहगंज, मेवा कटरा से ऐतिहासिक जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। यह बोदला स्थित दरगाह कदम रसूल पर जाकर समाप्त हुआ।
हिंदुस्तानी बिरादरी के अध्यक्ष एवं कबीर पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सिराज कुरैशी ने बताया कि आज के दिन दुनियाभर के मुसलमान खुशियां मनाते हैं। घरों और चौपालों पर रोशनी करते हैं और जरूरतमंदों को पकवान बांटते हैं। मस्जिदों में मोहम्मद साहब के बताए रास्तों पर चलने का संदेश दिया जाता है। उन्होंने गैर-मुस्लिम भाइयों की ओर से जुलूस का स्वागत होने पर धन्यवाद दिया। कहा कि सांप्रदायिक सौहार्द की यह मिसाल कायम रहनी चाहिए। हिंदुस्तानी बिरादरी के उपाध्यक्ष विशाल शर्मा, महासचिव विजय उपाध्याय, हाजी बिलाल, इरफान, सलीम, समी आगाई, बुंदन मियां, हाजी असलम, अदनान कुरैशी सहित हजारों लोग मौजूद रहे।
शहीद नगर कोल्हाई ताजगंज से भी जुलूस निकाला गया। जुलूस तेलीपाड़ा, पुरानी मंडी होते हुए मलको गली ताजगंज पर समाप्त हुआ। जुलूस के समापन पर लोगों ने देश में अमन-चैन की दुआ मांगी। रजा अहमद अंसारी, इरफान अल्वी, मुन्ना खान, अबरार कुरैशी, अरसलान कुरैशी, अरमान अली, हाजी मो. इस्लाम, यामीन, हाजी मुन्ना, मुकीम, लियाकत अल्वी भी मौजूद रहे।