अधिक पैदावार की चाह में अंधाधुंध रासायनिक और कीटनाशक के प्रयोग अब मिट्टी को बीमार बना रहे है। साल दर साल पैदावार घटने के साथ ही मिट्टी के पौषक तत्व, सूक्ष्म जीव नष्ट हो रहे हैं। इसकी पुष्टि क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला की रिपोर्ट करती है। सिर्फ आगरा ही नहीं, फिरोजाबाद, मैनपुरी और मथुरा के खेतों का भी यही हाल है।
सिंचित क्षेत्र के 2.50 एकड़ और असिंचित क्षेत्र के 10 एकड़ जमीन से लगभग तीन लाख मिट्टी के नमूने जुटाए। इनका प्रयोगशाला में परीक्षण किया तो नाइट्रोजन, पोटाश, फास्फोरस, सल्फर समेत अन्य पोषक तत्वों की भारी कमी पाई गई। इनमें पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों की संख्या भी बेहद कम थी।
प्रयोगशाला के निदेशक डा. यतेंद्र सिंह का कहना है कि रिपोर्ट के अनुसार पोषक तत्व मानकों के मुकाबले काफी कम पाए गए। कहीं तो स्थिति बेहद खराब रही। खेतों में रासायनिक खाद और कीटनाशक का जमकर छिड़काव किया जाना है। इससे 10 फीसदी तक पैदावार कम हो गई है।
मिट्टी में पौषक तत्वों का ये है हाल
soil testing
- नाइट्रोजन (मानक .75 प्रति हेक्टेयर)
34 फीसदी जमीन में 0.20 प्रतिशत प्रति हेक्टेयर
65 फीसदी जमीन में .2 से .5 प्रतिशत प्रति हेक्टेयर
एक फीसदी जमीन में .5 से .70 प्रतिशत प्रति हेक्टेयर
- फास्फोरस (मानक 40 किलो प्रति हेक्टेयर)
एक फीसदी में 7-13 किलो प्रति हेक्टेयर
98 फीसदी जमीन में 20-40 किलो प्रति हेक्टेयर
एक फीसदी जमीन में 40 किलो प्रति हेक्टेयर
- पोटाश (मानक 250 किलो प्रति हेक्टेयर)
60 फीसदी जमीन में 100-250 किलो प्रति हेक्टेयर
40 फीसदी 250 से अधिक प्रति हेक्टेयर
सूक्ष्म पौषक तत्व: (मात्रक पीपीएम)
तत्व मानक वर्तमान स्थिति
सल्फर 15 0.1
लोहा 1.2 0.6
जिंक 8.0 4.0
कॉपर 0.4 0.2
मैग्जीन 4.0 2.0
ये पड़ रहा है फसल पर प्रभाव
तमाम पौषक तत्वों की कमी से मिट्टी की उर्वरकता क्षमता कम हो रही है। फसल की गुणवत्ता भी खराब पाई जा रही है। नाइट्रोजन पौधों में वृद्धि का कार्य करता है तो फास्फोरस फल-फूल, फली के विकास में सहयोग करता है।
इसके अलावा पोटाश का कार्य मिट्टी से पौधों तक तत्वों को पहुंचाता है। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं ये तीनों तत्व मिट्टी के लिए बेहद जरूरी हैं, इनके कम-ज्यादा होने से पौधों का विकास और फल-फूल की गुणवत्ता भी खराब होती है।
किसान इसका रखें ख्याल
- किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं
- हर फसल के लिए खाद का अनुपात सही मात्रा में हो।
- सड़ी हुई गोबर की खाद का खेतों में इस्तेमाल करें
- कंपोस्ट, बर्मी कंपोस्ट, नैडप, बायोखाद खेतों में डालें