स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025 में जिस शहर को देश में तीसरा स्थान मिला है, वहां लोगों की सांसों पर संकट है। पांच साल से सांस रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024 तक पिछले 10 साल में फेफड़ा संक्रमण के सबसे ज्यादा मरीज एसएन मेडिकल कॉलेज पहुंचे हैं। जन सूचना अधिकार के तहत मिले ये आंकड़े हैरान करने वाले हैं।
बता दें, 10 लाख से अधिक आबादी वाले 48 देशों में आगरा नगर निगम मो तीसरा स्थान मिला था। इस पर मेयर हेमलता दिवाकर और नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सम्मानित किया था। हीराबाग कॉलोनी निवासी पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने एसएन मेडिकल कॉलेज से मेडिसिन विभाग की ओपीडी और भर्ती मरीजों के आंकड़े जन सूचना अधिकार में मांगे थे।
एसएन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 वर्षों में एसएन कॉलेज में 594 मरीज फेफड़े संक्रमण के कारण पहुंचे थे। कई फेफड़ों के कैंसर तक से संक्रमित थे। वर्ष 2024 में 2023 की तुलना 20 केस अधिक हैं। 2024 में 79 और 2023 में 59, वर्ष 2022 में 48 जबकि 2021 में 28 फेफड़े रोगी मिले थे। वहीं, सांस रोगी (सीओपीडी) के अलावा निमोनिया, टीबी, अस्थमा और खांसी के मरीजों की संख्या में पांच वर्षों से वृद्धि हो रही है।
पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता का कहना है कि स्वच्छ हवा के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम से लेकर शासन प्रशासन तक पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नहीं हैं। मरीजों के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं।
पीजी डिपार्टमेंट, एसएन मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट (ओपीडी/आईपीडी)
वर्ष सीओपीडी निमोनिया अस्थमा ब्रोंकाइटिस टीबी
2015 6341/522 1419/90 1032/30 634/23 1611/276
2016 7216/544 2176/98 984/34 947/80 1210/298
2017 6117/578 1791/104 937/42 74/28 1799/312
2018 5496/675 1634/132 1126/42 796/38 1747/480
2019 6739/879 1244/169 1274/48 1032/44 1041/405
2020 2147/705 917/111 976/36 437/36 634/477
2021 3137/733 2011/134 411/34 631/32 711/392
2022 5762/723 3214/119 1236/48 1024/34 1096/373
2023 7641/804 1976/132 1447/55 1937/52 2026/412
2024 9427/943 1214/131 2106/63 1436/39 1744/393