आगरा के धाकरान चौराहे के पास एक संपत्ति के लिए अलग-अलग पत्रों में विरोधाभासी एनओसी जारी होने का मामला सामने आया है। एक दस्तावेज में जमीन को नजूल भूमि बताया गया, जबकि दूसरे के आधार पर नक्शा स्वीकृत हुआ; अब प्रशासन और एडीए ने जानकारी जुटानी शुरू की है।
आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) और नजूल विभाग के कर्मचारियों-अधिकारियों और जमीन कब्जाने वालों की साठगांठ से एक बड़ा प्रशासनिक फर्जीवाड़ा सामने आया है। एमजी रोड पर धाकरान चौराहे के पास स्थित एक संपत्ति के लिए एक ही तारीख में दो अलग-अलग पत्रांकों से एनओसी जारी कर दी गई। एक में जमीन को सरकारी बताया गया तो दूसरे में राजकीय स्थान न होने का हवाला दिया गया। चूंकि मामले में तत्कालीन अफसरों और कर्मचारियों की भूमिका संदेह में हैं, ऐसे में प्रशासनिक अमला प्रकरण की गोपनीय जांच कराने में जुटा है।
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आगरा विकास प्राधिकरण के पास धाकरान स्थित संपत्ति के मालिक ने मानचित्र स्वीकृति के लिए ओबीपास पोर्टल पर 4 जनवरी 2025 की तारीख की एनओसी अपलोड करते हुए आवेदन किया। उस समय तहसीलदार सदर और नजूल मुहर्रिर की आख्या के आधार पर दावा किया गया था कि प्रश्नगत भूमि नजूल या राजकीय आस्थान की भूमि नहीं है, जिसके आधार पर प्राधिकरण ने मानचित्र स्वीकृत कर दिया। हैरानी की बात यह है कि नजूल विभाग द्वारा बाद में भेजे गए पत्र में कहा गया कि सर्वे शीट नंबर–107 मौजा–चक अव्वल शहर आगरा (सन 1929–30) के अनुसार नजूल भूखंड के अंतर्गत आता है, इसलिए एनओसी दिया जाना संभव ही नहीं है।
एक ही जमीन के लिए पहले मंजूरी और फिर आपत्ति लगाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। प्राधिकरण के सचिव संजय कुमार ने एडीएम प्रोटोकॉल अमरेंद्र वर्मा को पत्र लिखकर मामले में जानकारी मांगी है। चूंकि प्रकरण में प्रशासन और प्राधिकरण के कई कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका सवालों में हैं। इसीलिए मामले की गुपचुप तरीके से जांच की जा रही है।
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जिम्मेदारों पर गिरेगी गाज
एक ही भूखंड के लिए दो अलग-अलग विरोधाभासी एनओसी जारी होना सीधे-सीधे भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। फर्जी और झूठी आख्या के दम पर सरकारी जमीन पर नक्शा स्वीकृत कराने के मामले सामने आने के बाद अब प्रशासन के लिए प्रकरण गले की फांस बन गया है।
आगरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विजय कुमार ने बताया कि एक प्रकरण की जानकारी सामने आई थी। उससे जुड़े दस्तावेज के सत्यापन के लिए नजूल विभाग से जानकारी मांगी गई है। जवाब के आधार पर आगे कार्रवाई तय की जाएगी।
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बताया कि एडीए से एक एनओसी को लेकर कुछ जानकारी उपलब्ध कराई गई है। उसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।