आगरा के बरहन स्थित गांव नगला बेल के मजरा नगला सती में गुरुवार को पोखर पर कब्जा दिलाने पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम के साथ ग्रामीणों के संघर्ष के बाद रात को पुलिस ने घरों में घुसकर जबरदस्त तोड़फोड़ की।
विज्ञापन
पुलिस की पिटाई से घायल महिलाएं, पुरुष और बच्चे आधी रात को ही अपने घरों को छोड़कर भाग गए। पुलिस ने पांच लोगों को थाने में बंद करने के साथ ही 16 नामजद और 30-40 अज्ञात के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
गुरुवार की रात को पुलिस गांव में पहुंची तो दिन में संघर्ष और लाठीचार्ज से घायल महिलाएं, पुरुष और बच्चे घरों से बाहर की ओर भाग निकले। आधी रात के वक्त पुलिस ने नगला सती के घरों में जमकर तोड़फोड़ की।
विज्ञापन
घरों में रखा टेलीविजन, गैस चूल्हे, दरवाजे, घरेलू सामान आदि सामान नष्ट कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि रात करीब डेढ़ बजे पुलिस ने कालीचरन, रामदत्त आदि घरों में घुसकर महिलाओं और बच्चों से जमकर अभद्रता की।
मानसिंह और छोटेलाल के घरों में तोड़फोड़ की। पुलिस के डर से गांव के लोग अपने घरों को छोड़कर जा चुके हैं। बड़ी संख्या में घायल महिलाएं और पुरुष छिपकर अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं। घायलों में एक गर्भवती की हालत गंभीर बताई गई है।
नगला सती में बवाल के बाद नायब तहसीलदार डा. गजेन्द्र पाल सिंह की तहरीर पर पुलिस ने 16 ग्रामीणों को नामजद और 30-40 अज्ञात के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
नामजद में छह महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। पुलिस ने धारा 14/18 में 147, 148, 149, 332, 336, 352, 353, 307, 504, 506, 427 के अलावा सेवन सीएसए एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
नामजद में रवेंद्र सिंह, कालीचरन, मुन्नालाल, भूरी सिंह, ओमवीर, आकाश, राम अवतार, ओमप्रकाश, मीरा, इन्ना देवी, मीरा, गया देवी, मोहरश्री, रानी, धर्मेन्द्र, कालीचरन सभी निवासी नगला सती मौजा सेवरा बरहन शामिल हैं।
गांव पहुंचे पूर्व विधायक डा. धर्मपाल सिंह ने पुलिस की कार्रवाई की अन्याय पूर्ण बताया। घटना के पीछे उन्होंने सत्ताधारी नेताओं का दबाव बताया।
उन्होंने कहा कि वे 24 जनवरी को लखनऊ में प्रमुख सचिव और गृह सचिव से मिलकर मामले की शिकायत करेंगे। सपा नेता दिनेश यादव ने भी सत्ताधारी एक नेता के इशारे पर घटनाक्रम होना बताया है। उन्होंने कहा कि वे पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग करेंगे।