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आगरा पुलिस का दूसरा चेहरा: बुजुर्ग पिता की लाठी और बेटे की उम्मीदों का सहारा बन गई खाकी, यूं थाम लिया हाथ

Wed, 07 Jan 2026 12:01 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा पुलिस का दूसरा चेहरा  इंसानियत की मिसाल है। पुलिस एक बुजुर्ग बाप के लिए बुढ़ापे की लाठी बन गई, तो वहीं मासूम बेटे के लिए भविष्य की उम्मीद। जानें इस परिवार को पुलिस ने कैसे दिया सहारा...
 
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पुलिस ने की मदद। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा के थाना अछनेरा और छत्ता पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया, तो दूसरी तरफ थाना लोहामंडी पुलिस ने इंसानियत की मिसाल पेश की है। मजदूर की मौत के बाद 80 वर्षीय वृद्ध पिता के बुढ़ापे की लाठी तो 14 साल के बेटे की पढ़ लिखकर पैरों पर खड़े होने की उम्मीद टूट गईं थीं।
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दोनों रोते बिलखते पुलिस के पास गुहार लेकर आए। थाना प्रभारी निरीक्षक की पहल पर पुलिसकर्मी मदद में जुट गए। स्थानीय पार्षद और अन्य लोगों के सहयोग से न सिर्फ राशन की व्यवस्था की, बल्कि वृद्धावस्था पेंशन भी दिलवाई। पुलिसकर्मियों बेटे की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी उठाई है।

अशोक नगर, गोकुलपुरा में झोपड़ी में रहने वाले हरीबाबू (36) मजदूरी करते थे। 7 सितंबर को वह जगदीशपुरा क्षेत्र में काम पर गए थे। उनकी काम के दौरान तबीयत खराब हो गई, तो ठेकेदार घर छोड़कर चला गया। दो घंटे बाद हरीबाबू की मृत्यु हो गई थी। परिजन ने आरोप लगाया कि ठेकेदार की लापरवाही की वजह से जान गई है।
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थाना लोहामंडी के प्रभारी निरीक्षक उत्तम चंद पटेल ने बताया कि हरीबाबू की पत्नी और मां की पहले ही मृत्यु हो गई थी। पिता वृद्ध हैं। एक बेटा ही है। वह कक्षा आठ का छात्र है। मजदूर की माैत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया था। मामले की जानकारी एडीसीपी आदित्य सिंह को दी गई। उन्होंने पीड़ित परिवार की मदद के लिए कहा। इसके बाद पुलिस परिवार की मदद में जुट गई।
 
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