निजीकरण के विरोध में प्रदेशभर के ऊर्जा निगमों के साथ दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधिकारी और कर्मचारी भी मंगलवार कार्य बहिष्कार कर रहे हैं।
इससे दक्षिणांचल के अंतर्गत आने वाले 21 जिलों में बिजली संकट गहरा सकता है। इसके लिए शासन स्तर से पहले ही अलर्ट जारी किया जा चुका है।
आगरा के बाद प्रदेश सरकार लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और मुरादाबाद की विद्युत आपूर्ति निजी हाथों में देने की तैयारी में है। इसको लेकर प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने आवाज बुलंद कर दी है।
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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले 27 मार्च को कार्य बहिष्कार की घोषणा की गई है। इसमें तकनीकी क्षेत्र से जुड़े विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी कार्य बहिष्कार करेंगे।
ऐसे में बिजली आपूर्ति व्यवस्था चरमरा सकती है। यदि कहीं कोई फॉल्ट हो गया तो ठीक होना मुश्किल होगा। कार्य बहिष्कार को सफल बनाने के लिए समिति की ओर से टीमें गठित की गई हैं।
जोकि अपने-अपने क्षेत्रों के बिजली कार्यालयों में उपस्थित होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को भी कार्य करने से रोकेंगे। कार्य बहिष्कार के चलते संकट की स्थिति न आ पाए इसको लेकर मुख्य सचिव राजीव कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को पहले ही अलर्ट कर दिया था।
सख्ती से निपटा जाए
गोपनीय पत्र में कहा गया था कि बिजली आपूर्ति में किसी प्रकार के व्यवधान व तोड़फोड़ करने वालों से सख्ती से निपटा जाए। विद्युत प्रतिष्ठानों तथा कार्य करने के इच्छुक अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान की जाए।
दक्षिणांचल के अंतर्गत जिले में आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज, एटा, हाथरस, कानपुर, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, इटावा, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर, जालौन शामिल है।