आगरा उत्तर विधानसभा सीट पर कम वोट पड़ने से सिर्फ भाजपा की नहीं, अन्य दलों की नींद उड़ गई है। उपचुनाव में मतदान का आंकड़ा 39.45 फीसदी में ही सिमट कर रह गया, जो वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 18.95 फीसद कम है। वहीं, 18 अप्रैल को आगरा लोकसभा सीट के लिए हुए मतदान के दौरान इस विधानसभा क्षेत्र में 56.25 फीसदी मतदान हुआ था।
कारण यह है कि वैश्यों की तरह दलित और मुस्लिम वोटर भी कम निकले हैं। इन हालात में नतीजा कुछ भी हो सकता है। हालांकि भाजपाइयों के चेहरे कुछ ज्यादा खिले हैं। उन्हें लग रहा है कि दूसरों का वोट कम पड़ने से जीत पक्की है। सपाइयों को लग रहा है कि बूथ नहीं पहुंचे वोटर भाजपा के हैं।
2017 का नतीजा सबके सामने है। जगन प्रसाद गर्ग 80 हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे। तब वोट पड़े थे 58.4 फीसदी। अब 40 से कम पड़े हैं यानी लगभग 19 फीसदी मतदान कम हुआ। इन्हें वोटों में बदलें तो लगभग 75 हजार वोटर कम पहुंचे वोट डालने। इन 75 हजार पर ही सारा गणित लगाया जा रहा है।