अस्पतालों में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के निरीक्षण करने पर मरीजों से हो रही उगाही का खुलासा हुआ है। सर्जिकल सामान-दवाओं की एमआरपी पर ही बिल वसूले जा रहे हैं। महंगी दवाएं-सर्जिकल सामान से इलाज के खर्च में मरीजों का दम निकला जा रहा है।
एमआरपी पर दवाएं और सर्जिकल सामान मिलने से इलाज का खर्च बढ़ने पर शहर के सर्जन डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने सुप्रीम कोर्ट में वाद दायर किया है। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी भी की है। एमआरपी और फुटकर कीमत में कई गुना अंतर है। अस्पताल में भर्ती होने के कारण मरीजों को मजबूरी में यही दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
यहां स्वास्थ्य विभाग में 486 अस्पताल पंजीकृत हैं। लगभग सभी में मेडिकल स्टोर संचालित हैं। इनमें मरीजों के बिल और अन्य की जांच नहीं की जा रही है। सहायक आयुक्त औषधि अरविंद गुप्ता का कहना है कि जल्द ही अस्पताल में संचालित मेडिकल स्टोरों के बिल और अन्य की जांच की जाएगी।
आगरा फार्मा एसोसिएशन के पुनीत कालरा ने बताया कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों को मजबूरी में दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। अगर कोई मरीज बाहर से दवा खरीदकर ले जाए तो उसे स्वीकार नहीं करते हैं। इससे मरीज पर इलाज का खर्च बढ़ जाता है।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. पंकज नगायच का कहना है कि अस्पतालों में मेडिकल स्टोर की अलग से व्यवस्था होती है। फिर भी चिकित्सकों को मरीजों को दिए जा रहे बिल पर नजर रखनी चाहिए। मरीज डॉक्टर के चेहरे पर ही इलाज कराने अस्पताल आता है।
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सर्जिकल सामान
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फुटकर कीमत (रुपये)
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एमआरपी (रुपये)
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नेबुलाइजर मशीन
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650
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1,750
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आईवी सेट
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12
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221
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इंट्राकैथ
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6
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208
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सर्जिकल ग्लव्स
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15
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91
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क्रैप बैंडेज
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25
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235
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डायना प्लास्ट
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110
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1,680
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