आगरा। दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। कहा कि जी-तोड़ मेहनत का नतीजा है कि संस्थान नैक ए प्लस ग्रेड हासिल कर सका। प्रदेश के सात विश्वविद्यालय एशिया की उच्च रैंकिंग में हैं। विदेशी छात्र भी विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए आवेदन कर रहे हैं। उन्होंने लक्ष्य देते हुए कहा कि हमें यह प्रयास करना है कि संस्थान दुनिया के टॉप 100 विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में अपना स्थान बनाए।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए आगामी 25 वर्षों की आवश्यकता के लिए कार्ययोजना व विजन लेकर कार्य करें। विश्वविद्यालय को नैक का ए प्लस ग्रेड मिलना विश्वविद्यालय की कुलपति, सभी विभागों के अध्यक्ष, प्रोफेसर, सभी कर्मचारियों, सफाई स्टाफ आदि के प्रयास की मेहनत है।
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि यह ज्ञान, अनुशासन व संस्कार का उत्सव है। इसके बाद हम शिक्षा समाप्त कर नई दिशा की तरफ कदम बढ़ाते हैं। उन्होंने खुशी जताई कि इस बार दीक्षांत समारोह में बच्चों की पेंटिंग प्रतियोगिता हुई जिसमें ऑपरेशन सिंदूर की भी पेंटिंग बनाई गई। हैंडराइटिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने खूबसूरत हैंडराइटिंग की। वहीं भाषण प्रतियोगिता में बच्चों ने जल के महत्व पर अपनी स्पीच देकर प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में खेलो इंडिया का शुभारंभ किया। इससे पूर्व गुजरात में खेले गुजरात की पहल की। देश के लाखों बच्चों को ट्रेनिंग दी गई, जिससे खेल जगत में देश को लाभ हुआ है। सभी बच्चे अलग-अलग प्रतिभा से युक्त होते हैं। उनकी प्रतिभा की पहचान कर उन्हें निखारें, प्रतियोगिता को बढ़ावा दें। अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति के जीवन में बदलाव आए, यहीं इस दीक्षांत समारोह का हेतु होना चाहिए।
उद्योगपतियों से की अपील
राज्यपाल ने राजभवन के प्रयास से झुग्गी, झोपड़ी के बच्चों की शिक्षा, गरीब बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति आदि कराए जा रहे कार्यों का उदाहरण देते हुए गरीब बच्चों को शिक्षित बनाने में मदद करने की बात कही। कहा कि सामाजिक, व्यावसायिक संस्थाओं, उद्योगपति, विश्वविद्यालयों गरीब बच्चों को शिक्षित करने के लिए प्रयास करें। साथ ही विवि प्रशासन से कहा कि वह खुद भी प्रयास करें ताकि सीएसआर फंड के जरिये जरूरतमंद को शिक्षा मुहैया कराई जा सके। साथ ही उसे जरूरी सुविधाएं भी दिलाई जाए।
टैलेंट को निखारना जरूरी
उन्होंने हाल ही में अंतरिक्ष यात्रा से वापस लौटे शुभांशु शुक्ला का उदाहरण देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे छात्र तैयार करें जो दुनिया में नाम रोशन करें। हमारा देश विकसित राष्ट्र बोलने से नहीं काम करने, बदलाव लाने से बनेगा। आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को किट प्रदान करने का उदाहरण देकर कहा कि जब तक अंतिम छोर पर विकास नहीं पहुंचेगा, लोग आगे कैसे बढ़ेंगे।