महिलाओं को किराये पर गाड़ी करके नेपाल तक ले जाया जाता है। इस दौरान पहली बार बार्डर पर पुलिस के रोकने पर कहा जाता है कि इलाज के लिए ले जा रहे हैं। बाद में आठ महीने की गर्भवती महिला को ले जाने पर पुलिस नहीं रोकती है। तब यह कहा जाता है कि परेशानी में लेकर जा रहे हैं। पुलिस से बात करने का काम एजेंट ही करते हैं।
ऐसे चलता है नेटवर्क
- गैंग सरगना अस्मिता के पास दो तरह के एजेंट हैं। एक उन दंपती को लाते हैं जिन्हें बच्चे की जरूरत हो। दूसरे उन महिलाओं को लाते हैं जिन्हें पैसे की जरूरत हो।
- दिल्ली, यूपी, हरियाणा के जरूरतमंद दंपती एजेंटों के माध्यम से अस्मिता से मिलने नेपाल जाती हैं। वह सरोगेसी की रकम तय कर लेती है।
- रकम मिलने पर दूसरे एजेंटों को उन महिलाओं की तलाश में लगाया जाता है जो पैसा लेकर किराए पर कोख देने के लिए तैयार हों।
- आगरा सहित चार राज्यों में फैले एजेंट महिलाओं को नेपाल तक ले जाते हैं। पहले सरोगेसी के लिए। इसके बाद प्रसव केलिए।
( जैसा एसपी प्रमोद कुमार ने बताया )
संबंधित खबरें: