टंकी से नीचे कूदने की कोशिश करती महिला सुनीता सिंह को पकड़ते ग्रामीण
कागारौल। ब्लॉक खेरागढ़ की ग्राम पंचायत बेरी चाहर के गांव गढ़मुक्खा में रविवार सुबह उस समय अफरातफरी मच गई, जब पेयजल संकट से गुस्साए दर्जनों ग्रामीण गांव की बंद पड़ी पानी की टंकी पर चढ़ गए। वर्षों से सूखे तालाब को भरवाने और बंद टंकी को चालू करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान टंकी पर चढ़ीं क्षेत्र पंचायत सदस्य सुनीता सिंह ने टंकी से नीचे कूदने का प्रयास किया। वह टंकी से लटक गईं, जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत उन्हें खींचकर सुरक्षित किया। ग्रामीण लंबे समय से गांव के सूखे तालाब में पानी भरवाने की मांग कर रहे थे। पूर्व में मिले आश्वासन के बाद शुक्रवार को नहर से तालाब तक नाली खुदाई का काम शुरू हुआ था। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि दिगरौता निवासी मांगेलाल बघेल ने अपने खेत से नाली निकालने का विरोध कर काम रुकवा दिया, जिससे ग्रामीण भड़क गए। ग्रामीणों ने बताया कि साल 2019 में सांसद राजकुमार चाहर और तत्कालीन विधायक महेश गोयल ने इस पानी की टंकी का शिलान्यास किया था। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी कुछ ही समय में सप्लाई बंद हो गई और तब से यह टंकी सिर्फ शोपीस बनी हुई है। रविवार सुबह करीब 8 बजे सत्यवती देवी, राजकुमारी, राजवती, कैलादेवी, सुनीता सिंह, गीता देवी, रूपा, पार्वती, मिथलेश, रवि ठाकुर, महेंद्र सिंह, रोहित चाहर सहित दो दर्जन से अधिक ग्रामीण टंकी पर चढ़ गए। बाद में भ्रष्टाचार विरोधी सेना के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र चाहर उर्फ भोलू जाट के नेतृत्व में ग्रामीण नहर पर पहुंच गए और नाली निर्माण की मांग को लेकर अड़ गए। एसीपी सैंया डॉ. सुकन्या शर्मा, नायब तहसीलदार अभिषेक कुमार, एडीओ पंचायत दीवान सिंह, थाना प्रभारी अंकुर राठी, मलपुरा पुलिस माैके पर पहुंची। समाजसेवी शौर्येन्द्र चाहर और अधिकारियों ने वार्ता की। सीमांकन कराकर समस्या का स्थायी समाधान निकालने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीण टंकी से नीचे उतरे।
वर्जन
तालाब में पानी की मांग को लेकर कुछ ग्रामीण पानी की टंकी पर चढ़ गए थे। पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर उन्हें समझा-बुझाकर सुरक्षित नीचे उतार लिया। जमीन की पैमाइश के लिए समय तय किया गया है, जिसके बाद समस्या का समाधान कराया जाएगा। फिलहाल मौके पर पूरी तरह शांति है।
-डॉ. सुकन्या शर्मा, एसीपी सैंया