बाह। डेढ़ दशक से बटेश्वर में यमुना बचाओ अभियान चला रहे महंत सियाराम दास ने रविवार को देवोत्थान एकादशी पर्व पर पूजन के बाद पदयात्रा निकाली।
यमुना पूजन के बाद सप्तकोसीय पदयात्रा शुरू हुई। बटेश्वर, जज्ञ, शौरीपुर, मोरहारी, हनुमानगढ़ी, मनमथ होती हुई आश्रम पर संपन्न हुई। पदयात्रा में महिलाएं गीतों में यमुना मैया की महिमा का बखान करते हुए चल रही थीं पद यात्रा के समापन पर उन्होंने श्रद्धालुओं को यमुना में गंदगी न डालने की शपथ दिलाई। कहा कि बटेश्वर में 106 करोड़ की लागत से विकसित हो रहे मंदिर, घाट एवं काॅरिडोर से बेशक ब्रज की काशी का वैभव बढ़ा है। मैली यमुना का आंचल साफ हो जाए तो मंदिर शृंखला और घाटों की सुंदरता बढ़ जाएगी। धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विरासत को सहेजने का सरकार का काम सराहनी है। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बटेश्वर में यमुना के मैले आंचल की पीड़ा को सुनेंगे, समझेंगे। उन्होंने संतों के साथ ही श्रद्धालुओं से यमुना की पवित्रता के लिए मुख्यमंत्री को पत्राचार किए जाने का आह्वान किया।समापन के बाद गोकुलनाथ मंदिर में तुलसी शालिग्राम की पूजा के लिए श्रद्धालु पहुंचे। एकादशी मंदिर की पूजा के लिए भी श्रद्धालुओं का जमघट लगा रहा। श्रद्धालुओं ने यमुना नदी में दीपदान कर गौरीशंकर मंदिर में शिव पार्वती को पूजकर अपने परिवार की सुख समृद्धि की कामना की।
सांस्कृतिक मंच: महावीर चाहर ने गाए लोक गीत, रासलीला में महारास ने मोहा मन
बाह। बटेश्वर मेले के सांस्कृतिक मंच पर रविवार को महावीर चाहर ने लोक गीत गाए। भजन और गीतों के जरिए शासन की योजनाओं के बारे में दर्शकों को जागरूक किया। उनके साथ सुरेंद्र, प्रेमपाल, सत्यपाल, राजकुमार ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। लोक गायन के बाद रासलीला में हुए महारास ने दर्शकों का मन मोह लिया। श्री ब्रजरज राजेश्वरी लीला संस्थान वृंदावन के सुरेश कुमार ब्रजवासी ने बताया कि ब्रज के गीत और नृत्य के साथ महारास हुआ। राधा-कृष्ण की आरती के साथ ही कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। संवाद