बाह में दीवाली पर तेजी से घूमने लगा चाक
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बाह। दिवाली पर मिट्टी के दीयों से घर को रोशन करने की परंपरा सदियों पुरानी है। स्वदेशी अपनाने के आह्वान के साथ ही त्योहार नजदीक आने पर कुम्हार के चाक की रफ्तार तेज हो गई है। अच्छी कमाई की उम्मीद में कुम्हार परिवार दीये बनाने, पकाने, रंगने में दिन रात एक किए हुए हैं। जरार के नेत्रपाल दीये बनाने में जुटे हुए हैं। बच्चे भी साथ दे रहे हैं। पूछने पर बोले कि पिछले साल डेढ़ लाख दीये बिके थे। इस साल दो लाख दीये बनाए हैं। मंहगाई बढ़ी है। अच्छी कमाई की उम्मीद है। बिजकौली में नरेश और उनके परिवार के लोग देसी और इलेक्ट्रिक चाक से दीये बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक चाक से दो गुने तक दीये बन जाते हैं। उत्पादन बढ़ा है। आजीविका में सुधार हुआ है। पिछले साल 100 दीये की 60-70 रुपये कीमत मिली थी। इस साल एक रुपये दीये के ऑर्डर मिले हैं। ऐसे में त्योहार पर घर पर खुशहाली की उम्मीद है। जैतपुर, सिधावली, बिजौली, भदरौली में भी कुम्हार परिवार दीये बनाने में जुटे हुए हैं।