जान हथेली पै: अटेर पुल तक पहुंचने को नसेनी चढ़ते लोग
बाह। अटेर पुल तक पहुंचने के लिए 14 मीटर की ऊंचाई तक सीढ़ी पर चढ़ते लोगों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं। 50 किमी का फेर बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने से बाज नहीं आ रहे लोग। मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश की सीमा स्थित चंबल नदी पर पुल बनकर तैयार हो गया है। मध्य प्रदेश के छोर पर पहुंच मार्ग का भी निर्माण हो रहा है। अनुमति के चक्कर में जैतपुर के नंदगवा क्षेत्र में पहुंच मार्ग का निर्माण कार्य रुका पड़ा है। करीब 3 महीने पहले पुल के रास्ते दो पहिया और चार पहिया वाहन भिंड और बाह के बीच आने जाने लगे थे। लेकिन निर्माण एजेंसी ब्रिज कार्पोरेशन ने करीब 35 से 40 फीट गहरी खाई खोद दी है। जिससे पुल पर पैदल भी आवाजाही बंद हो गई थी। उदी के रास्ते भिंड और अटेर पहुंचने के लिए क्षेत्र के लोगों को 50 से 60 किमी तक अतिरिक्त फेर लगाना पड़ रहा था। समय और दूरी की बचत के चक्कर में जैतपुर, अटेर, बाह, भिंड के लोग सीढ़ी चढ़कर पुल तक पहुंच रहे हैं। जान हथेली पर रखकर पुल तक पहुंच रहे लोगों की तस्वीरें सामने आई हैं। इस संबंध में पूछे जाने पर एसओ खेड़ा राठौर ने बताया कि मध्य प्रदेश की सीमा में सीढ़ी आदि रखी गई हैं। खेड़ा राठौर क्षेत्र में ऐसी कोई गतिविधि देखने को नहीं मिली है।
10 साल में अटेर पुल ने कई बदलाव देखे, एनओसी का पेच फंसने पर 2028 तक बनने पर संशय- 2016 में अटेर पुल के निर्माण का काम शुरू हुआ था। 850 मीटर लंबे अटेर पुल की ऊंचाई 12 मीटर थी। 4 साल पहले चंबल में आई बाढ़ में पुल के पिलर डूब गये थे। लिहाजा पुल की 2 मीटर ऊंचाई और 300 मीटर लंबाई बढ़ा दी गई। इसके लिए 23.46 करोड़ का अतिरिक्त बजट मंजूर किए जाने के साथ पुल निर्माण का लक्ष्य अप्रैल 2028 में पूरा किए जाने का रखा गया। पुल तैयार हो गया है। मध्य प्रदेश की सीमा में 50 मीटर का पुल का पहुंच मार्ग बनने लगा है। उत्तर प्रदेश की सीमा में बनने वाले 250 मीटर के पहुंच मार्ग के निर्माण की अनुमति उत्तर प्रदेश वन विभाग से नहीं मिली है। निर्माण एजेंसी ब्रिज कार्पाेरेशन के इंजीनियर जोगिन्दर सिंह यादव ने बताया कि उत्तर प्रदेश वन विभाग से अनुमति नहीं मिल पा रही है, इस संबंध में पत्राचार एवं कार्यवाही जारी है। एनओसी मिलते ही पहुंच मार्ग का निर्माण शुरू हो जाएगा। संवाद