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नगर निगम का अजब काम: 43 डिग्री में लगाए जा रहे नए पौधे, पुराने पानी न मिलने से सूखे; पांच करोड़ हो रहे खर्च

Sun, 17 May 2026 01:56 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

नगर निगम के अधिकारी बीते 6 वर्षों में 40 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर चुके हैं। सीमेंटेड ट्री गार्ड और 8500 बड़े गमलों को रखवाया गया था। इस साल भी 5 करोड़ रुपये का बजट हरियाली के नाम पर रखा गया है। 
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हाईवे के डिवाइडर पर लगे पाैधे। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा में 43 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच चिलचिलाती धूप में नगर निगम के कर्मचारी अजब काम कर रहे हैं। नेशनल हाईवे के डिवाइडर पर आईएसबीटी फ्लाईओवर पर गमलों में फूलदार पौधे लगाने में जुटे हैं, जबकि उद्यान विशेषज्ञों के मुताबिक मई-जून की तेज धूप में पौधे लगाने नहीं, बल्कि पुराने लगे पौधों को बचाने की जरूरत है। नए पौधे लगाने का सीजन जुलाई में दो बारिश होने के बाद है। निगम के ही बीते वर्षों में हाईवे किनारे गमलों में लगाए गए पौधे पानी न मिलने से झुलसकर सूख चुके हैं।
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आगरा नगर निगम ने हाईवे के चौड़ीकरण के बाद काटे गए पेड़ों की जगह बड़े गमले रखकर पौधे लगाए। पानी न मिलने से ये सूख रहे हैं। डिवाइडरों और फुटपाथ पर बड़े-बड़े गमलों में जो पौधे लगाए, उनमें से अधिकांश झुलस चुके हैं। ज्यादातर गमले क्षतिग्रस्त हैं। ऐसे में डिवाइडरों पर बेहद छोटे और फूलदार पौधे लगाए जा रहे हैं, जबकि 43 डिग्री की गर्मी में ये पौधे जीवित नहीं रह सकते।

यही हाल एमजी रोड-2 का भी है, जहां पानी न मिलने से पौधे सूख रहे हैं। नगर निगम के टैंकरों पर एसटीपी के शोधित पानी से इनकी सिंचाई की व्यवस्था है, लेकिन गर्मी में पौधों के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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40 करोड़ से ज्यादा खर्च
गमलों में हरियाली उगाने पर नगर निगम के अधिकारी बीते 6 वर्षों में 40 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर चुके हैं। सीमेंटेड ट्री गार्ड और 8500 बड़े गमलों को रखवाया गया था। इस साल भी 5 करोड़ रुपये का बजट हरियाली के नाम पर रखा गया है। पार्षद बंटी माहौर के मुताबिक मानसून में ही पौधे लगाने का उपयुक्त समय है। इस समय तेज धूप से फूलदार पौधे झुलस जाएंगे। हाईवे पर ट्रकों से निकलने वाले काले धुंए में पौधे जीवित नहीं रह सकते। ये फिजूलखर्ची है।

विशेषज्ञ बोले- ठिकाने लगा रहे बजट, यह सिर्फ बर्बादी
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की उद्यान शाखा के पूर्व निदेशक डॉ. हरबीर सिंह ने बताया कि ये पौधे लगाने का समय नहीं है। खासकर फूलदार पौधे तो कतई नहीं लगाए जा सकते। जो पौधे नर्सरी में हैं, उन्हें गमलों में लगाने या शिफ्ट करने पर 50 फीसदी के मरने की आशंका है। ये सिर्फ बजट ठिकाने लगाने की कवायद है। पर्यावरणविद चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि यह समय पौधों के बचाने का है, न कि लगाने का। हाईवे पर कनेर, टिकोमा, गुड़हल जैसे पौधे मानसून में लगाने चाहिए। जनता का पैसा इस तरह बर्बाद किया जा रहा है। इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।

देखभाल के लिए अलग से बनाई जाएगी टीम
इस सीजन में पौधों को बचाने का काम किया जा रहा है। हाईवे पर जिन पौधों को लगाया गया है, उसे एक बार देखेंगे कि क्या वे इस सीजन में लग सकते हैं या नहीं। पौधों को पानी देने के लिए अलग से टीम बनाई जाएगी। -शिशिर कुमार, अपर नगर आयुक्त, नगर निगम
 
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