आगरा में मेट्रो चलाने की योजना सवालों में उलझ गई है। जमीन की स्थिति स्पष्ट न होने के कारण आगरा मेट्रो की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में पेश नहीं हो सकी। प्राधिकरण के अधिकारियों को दो दिन के अंदर सवालों का जवाब दाखिल करना होगा।
आगरा मेट्रो की डीपीआर राइट्स संस्था ने तैयार की थी। मेट्रो योजना 2017 के तहत संशोधन और सिटी का कांप्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान तैयार करने के बाद डीपीआर दोबारा शासन को भेजी गई थी।
डीपीआर को मंगलवार को लखनऊ में हुई कैबिनेट की बैठक में प्रस्तुत करना था लेकिन आगरा मेट्रो की डीपीआर मंगलवार को पेश नहीं किया जा सका। प्राधिकरण के सूत्रों का कहना है कि डीपीआर में जमीन से संबंधित कुछ ऐसे सवाल थे जिनके बार में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी। प्रमुख सचिव स्तर पर हुए परीक्षण के बाद इसे रोक लिया गया है। शासन के प्रश्नों का उत्तर दो दिन अंदर भेजना होगा।
ये उठे सवाल
आगरा मेट्रो की डीपीआर में शहर में दो कारीडोर प्रस्तावित किए गए हैं। पहला कारीडोर सिकंदरा से लेकर फतेहाबाद रोड पर ट्राइडेंट होटल तक है और दूसरा कारीडोर आगरा कैंट रेलवे स्टेशन से लेकर छलेसर तक है। इनके तहत एक यार्ड पीएसी परिसर में प्रस्तावित है और दूसरा छलेसर में झरना नाले के पास प्रस्तावित किया गया है।
शासन ने पूछा है कि पूरी मेट्रो योजना के तहत जितनी जमीन ली जाएगी वह किस-किस विभाग की है? इसमें कितनी जमीन ऐसी है जो निजी संपत्ति है? जिन विभागों की जमीन ली जाएगी उसका मुआवजा देना होगा? या जमीन मुफ्त मिलेगी? कोई जमीन विवादित तो नहीं है? इन सवालों के जवाब देने के बाद ही डीपीआर को आगे बढ़ाया जाएगा।
26 को हो सकता है शिलान्यास
प्राधिकरण के सूत्रों का कहना है कि आगरा मेट्रो का शिलान्यास गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर हो सकता है। दरअसल, डीपीआर के संबंध में आए सवालों का जवाब जल्द से जल्द मांगा गया है और डीपीआर को 16 जनवरी को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने की योजना है।
इसके बाद परिचालन के माध्यम से डीपीआर पर अन्य विभागों की स्वीकृत ली जा सकती है। आगरा में केवल मेट्रो ही नहीं सिविल एन्क्लेव के शिलान्यास होने की भी संभावना है।