लेदर पार्क में हो रही खेती- फाइल फोटो
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आगरा-जयपुर राजमार्ग पर लेदर पार्क परियोजना पिछले 15 वर्षों से कानूनी दांव-पेच और पर्यावरणीय आपत्तियों के बीच फंसी है। वर्ष 2011 से जारी कानूनी लड़ाई अब सार्वजनिक धन और युवाओं के रोजगार पर भारी पड़ रही है।
वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने बताया कि परियोजना के लिए 15 साल पहले बरौदा, पाली और महुअर गांवों की लगभग 273 एकड़ भूमि अधिगृहीत कर 5.22 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। इसके बावजूद, एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के बीच लंबित मामलों के कारण निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
बीते 18 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने पुनः एनजीटी को मामले का शीघ्र निस्तारण करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि यह देरी न केवल औद्योगिक भविष्य को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि सरकारी धन की बर्बादी भी है। आवश्यकता इस बात की है कि पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन बिठाते हुए समयबद्ध निर्णय लिया जाए ताकि क्षेत्र में निवेश और रोजगार के द्वार खुल सकें।