नगर निगम का 22वां अधिवेशन खानापूर्ति में सिमट कर रह गया। चार घंटे चले सदन के दौरान सिर्फ केंद्र सरकार की योजनाओं पर मंथन हुआ। शहर की समस्याओं से जुड़े एक भी प्रस्ताव पर चर्चा तक नहीं हुई। आनन-फानन में सदन समापन की घोषणा के बगैर महापौर और नगर आयुक्त उठकर चलने लगे तो पार्षद उबल पड़े। हंगामा करते हुए महापौर की डायस पर कब्जा कर उनके खिलाफ नारेबाजी की। कुछ पार्षद अपने दल के नेता पर अधिकारियों से मिलीभगत का आरोप लगाया। इस बीच मौका पाते ही महापौर और नगर आयुक्त निकल गए। गुस्साए पार्षदों ने प्रस्तावों पर चर्चा के लिए विशेष सदन बुलाने की मांग की है।
महापौर इंद्रजीत सिंह आर्य ने सोमवार को नगर निगम अधिवेशन बुलाया था। कोरम पूरा न होने से सदन की कार्रवाई दोपहर 12 बजे की बजाय एक बजे के बाद शुरू हो पाई। सबसे पहले नगर आयुक्त इंद्रविक्रम सिंह ने पार्षद उमेश चंद एडवोकेट, अशोक बंसल और संजय सिंह धनगर द्वारा पूछे गए छह सवालों का जवाब दिया। इस पर एक घंटे तक बहस चली। इसके बाद नगर आयुक्त ने केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना के बारे में पार्षदों को जानकारी दी। उन्होंने योजना के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों पर प्रकाश डाला। इस बीच सवा तीन बजे लंच ब्रेक हो गया। अपराह्न लगभग पौने चार बजे सदन की कार्यवाही फिर शुरू हो हुई। स्वच्छ भारत अभियान की जरूरत और इसके अंतर्गत होने वाले कार्यों के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद अटल नवीनीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) के तहत शहर में होने वाले विकास कार्यों पर चर्चा हुई। तब तक पांच बज गए। इसी दौरान सपा पार्षद दल के नेता मुकेश यादव ने पिछले दिनों एक पार्षद की असमय मृत्यु होने पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए शोक संदेश पढ़ना शुरू कर दिया। दो मिनट के बाद महापौर और नगर आयुक्त उठकर चल दिए। महापौर ने सदन समाप्ति की घोषणा भी नहीं की। विभिन्न पार्षदों ने शहर की समस्या से जुड़े 45 प्रस्ताव लगाए थे, मगर एक पर भी चर्चा नहीं हुई। इसको लेकर सदन में मौजूद दो दर्जन से अधिक पार्षद भड़क गए। हंगामा शुरू कर दिया। कोई महापौर की डायस पर बैठ गया तो किसी ने कुर्सी उठा ली। इस बीच महापौर और नगर आयुक्त सहित अन्य अधिकारी भी मौका पाकर निकल गए। इसके बाद पार्षदों ने सभागार से बाहर निकलकर खूब हंगामा किया। पार्षद रवि माथुर, राजपाल, हेमंत प्रजापति, उमेश यादव, मधुबाला, मोहन सिंह लोधी सहित लगभग 24 पार्षदों ने प्रस्तावों पर चर्चा के लिए विशेष सदन बुलाए जाने की मांग की है।
पार्षदों ने अपने ही दल के नेताओं के खिलाफ खोला मोर्चा
पार्षदों ने सदन में अपने ही दल के नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन पर गंभीर आरोप लगाए। विभिन्न दलों के पार्षदों ने कहा कि सदन में सभी पार्षद दल के नेताओं की अधिकारियों के साथ मिलीभगत है। वह अधिकारियों के इशारे पर ही सदन को चलने देते हैं। पार्षदों का कहना है कि यही वजह है कि जब भी कभी सदन में अधिकारियों को घेरने वाले मुद्दों पर चर्चा होनी होती है तो पार्षद दल के नेता सदन खत्म कराने में अधिकारियों से मिल जाते हैं। पार्षदों द्वारा उठाई जाने वाली क्षेत्रीय समस्याएं ताक पर रखी जा रही हैं।