भीषण गर्मी और तेज धूप लोगाें को जैविक तनाव दे रही है। इससे उनमें गुस्सा, चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। सामान्य लोगों में भी ये परेशानी हो रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज और मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में ऐसे मरीजाें की संख्या 15 फीसदी तक बढ़ गई है।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि ओपीडी में औसतन रोजाना 250 मरीज आ रहे हैं। हेल्पलाइन नंबर टेलीमानस 14416 पर भी फोन आ रहे हैं। इसमें गुस्सा अधिक आना, तेज आवाज में बात करना, भूख कम लगना, व्यवहार में बदलाव आना, चिड़चिड़ापन समेत कई अन्य परेशानी बताते हैं। पूछताछ में घर और कार्यालय में गर्मी से बचाव के बेहतर उपाय न होने की जानकारी मिली।
प्रो. दिनेश ने बताया कि नींद स्वस्थ शरीर के लिए औषधि का कार्य करती है। भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान से लोग स्वस्थ नींद नहीं ले पा रहे हैं। पसीना के जरिये शरीर में खनिज और लवण तत्वों की कमी हो रही है। यही जैविक तनाव को बढ़ाता है। एसएन मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल सिन्हा ने बताया कि ओपीडी में रोजाना औसतन 120 मरीज आ रहे हैं। इसमें कई ऐसे नए मरीज हैं, जिनके व्यवहार में बदलाव होने पर परामर्श लेने आए। इनकी दिनचर्या और गर्मी की वजह से नींद प्रभावित मिली। इनको गर्मी से बचाव और ठंडी सामग्री वाले खानपान के बारे में जागरूक किया गया। अस्थायी तौर पर दवा भी दी गई।
इन बातों का रखें ध्यान
- घर-कार्यस्थल पर गर्मी से बचाव के बेहतर इंतजाम करें।
- शाम को नहा सकते हैं। शरीर साफ रखें, साफ-सूती कपड़े पहनें।
- रात में तला भोजन न खाएं। सलाद, मौसमी फल खाएं।
- धूम्रपान, तंबाकू और शराब से बचें। फास्टफूड-जंक फूड से बचें।
- नींबू पानी, आम पना, लस्सी, छाछ, दही , नारियल पानी पीएं।