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UP: आगरा-ग्वालियर हाईवे की सबसे बड़ी खामी, जिससे कोहरे में हुआ भीषण हादसा...2 की मौत, कई वाहन आपस में टकराए

Tue, 06 Jan 2026 09:25 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा-ग्वालियर हाईवे हादसा पर घने कोहरे में एक के बाद एक आधा दर्जन वाहन आपस में टकरा गए। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई। जहां पर ये हादसा हुआ वहां डिवाइडर की रेलिंग नहीं थी। साइन बोर्ड और लाइट भी गायब थी। 
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road accident - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा- ग्वालियर हाईवे पर सोमवार सुबह एक के बाद एक छह वाहन आपस में टकरा गए, जिसमें दो लोगों की जान चली गई। इस हादसे के बाद हाईवे पर सुरक्षा के इंतजाम का बड़ा सवाल खड़ा हो गया। हाल ही में मथुरा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए हादसे के बाद राजमार्गों पर सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। इसके बावजूद कहीं रेलिंग नहीं है तो कहीं साइन बोर्ड नहीं लगे हैं। फॉग लाइट न होने पर कोहरा होने पर रास्ता दिखना भी मुश्किल हो रहा है। जिस जगह पर हादसा हुआ, वहां भी डिवाइडर की रेलिंग नहीं है। साइन बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। लाइट भी गायब है।
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इरादत नगर क्षेत्र के कुर्राचित्तरपुर मोड़ से खारी नदी तक हाईवे पर रेलिंग नहीं है। साइन बोर्ड भी खराब पड़े हैं। करीब 2 किलोमीटर तक हाईवे का सर्विस रोड नहीं है। जगह-जगह से लोग सड़क पर आते हैं। इस वजह से हादसों का डर बना रहता है। ग्वालियर हाईवे पर रोहता नहर से गांव बाद तक कई जगह गड्ढे हैं।
धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि गड्ढों के कारण गाड़ी अनियंत्रित हो जाती हैं। गांव ककुआं और इटोरा पर भी यही स्थिति है। राहगीर सुशील कुमार ने बताया कि वह बाइक से आगरा जा रहे थे। इटोरा स्थित एक गड्ढे में बाइक फिसल गई। बाल-बाल बचे।
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मददगार बने नगला इमली के ग्रामीण, बचाई जान
ग्वालियर हाईवे स्थित गांव नगला इमली में सोमवार सुबह कोहरे में 6 वाहनों के टकराने से जाम लग गया। हादसे के बाद पुलिस के पहुंचने से पहले ग्रामीण मदद के लिए आ गए। उन्होंने कार और बड़े वाहनों में फंसे घायलों को बाहर निकाला। इसके साथ ही आगे जाकर वाहनों को रुकने का इशारा किया। इस पर वाहनों की रफ्तार कम हो सकी। उनकी सजगता से अन्य वाहन टकराने से बच गए।

 

गांव की रहने वाली विमला देवी ने बताया कि सुबह वह रास्ते से निकलकर जा रही थीं। तभी तेज आवाज सुनाई दी। वह घबरा गईं।उन्होंने हाईवे पर देखा तो वाहन टकरा गए थे। वाहनों में लोग चीख रहे थे। उन्होंने शोर मचा दिया। इस पर आसपास से निकल रहे गांव के लोग दाैड़ पड़े। पूर्व सैनिक सत्येंद्र सिंह चाहर ने बताया कि वह अपने खेत पर जा रहे थे। हादसा देखकर रुक गए। बचाव कार्य में लग गए। घायलों को बाहर निकालकर लाए।

 

ग्रामीण मुकेश कुमार ने बताया कि तेज धमाके की आवाज सुनकर वह घर से बाहर निकले। गांव के अन्य लोग भी बचाव कार्य में जुट गए। सभी ने ट्रक चालक और कार सवारों को निकाला। कोहरे की वजह से डर भी लग रहा था कि अन्य गाड़ी ना टकरा जाए। इसलिए रास्ते में कुछ लोग आगरा की ओर चले गए। वाहनों को इशारा करके रोका। सोहन सिंह ने बताया कि वह अपनी चाय की दुकान पर बैठे हुए थे। उन्होंने भी लोगों को निकालने में मदद की।

 

सभी रास्ते हैं खतरनाक
खंदौली में हाथरस मार्ग स्थित एनएच-509 पर रामबाग से वरोस टोल प्लाजा तक कहीं भी स्ट्रीट लाइट नहीं हैं। अंधेरे और घने कोहरे के कारण रात के समय हाईवे पर पशु खुलेआम आते रहते हैं, जिससे हादसों की आशंका बनी रहती है। चौराहों पर रिफ्लेक्टर और संकेतक भी नहीं लगाए गए हैं। बैरियर नहीं लगाए गए हैं, जिससे तेज रफ्तार वाहन बेखौफ होकर गुजरते हैं। ओवरस्पीड वाहनों के खिलाफ चालान की कार्रवाई भी न के बराबर है।

 

फतेहाबाद-शमसाबाद और आगरा मार्ग पर कई घुमावदार मोड़ और आबादी वाले क्षेत्र हैं। इन स्थानों पर न तो सांकेतिक बोर्ड लगे हैं और न ही रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं। स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी नहीं है। घने कोहरे के दौरान वाहन चालकों को मोड़ व आबादी क्षेत्र का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे आए दिन बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं। सैंया में स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। रेलिंग टूटी हुई है।

 
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रुनकता में आगरा-मथुरा हाईवे के सर्विस रोड पर हीरालाल प्याऊ के पास बिजलीघर के बाहर ट्रांसफॉर्मर और अन्य उपकरण लगे हैं। इस कारण हादसों का खतरा बना हुआ है। वहीं फ्लाईओवर से मथुरा की दिशा में जाने वाले वाहन हाईवे पर तेज गति से चलते हैं। ऐसे में सर्विस रोड से अचानक हाईवे पर प्रवेश करने वाले वाहनों के कारण दुर्घटनाओं की संभावना लगातार बनी रहती है।
 
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