यूनेस्को की विश्व धरोहर आगरा किले में खासमहल से सटे बंगला-ए-रोशनआरा और जहांआरा सूरज की तरह चमक बिखेरेंगे। इनके ऊपर तांबे से बनाई गई छतरियों पर सुनहरी पॉलिश की गई है। जल्द ही इसका केमिकल ट्रीटमेंट भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की विज्ञान शाखा करेगी। इसका प्रस्ताव दिल्ली स्थित मुख्यालय भेजा गया है।
आगरा किले के अंगूरी बाग के उत्तर में खासमहल से सटाकर दोनों छतरियां हैं। यहां से यमुना किनारा और सामने ताजमहल नजर आता है। इसी के पास मुसम्मन बुर्ज है, जहां मुगल बादशाह शाहजहां को कैद में रखा गया था। रोशनआरा और जहांआरा के महल संगमरमर से तामीर किए गए थे। उनके ऊपर सोने के कलश और चादर से छतरियां बनाई गई थीं।
ताजमहल से देखने पर ये सूरज की तरह चमकती दिखती हैं। मुगलों के हाथ से किला जाने के बाद छतरियाें को सोने की जगह अष्टधातु में बदल दिया गया, जिस पर सुनहरी पॉलिश की गई थी। हालांकि, अब यहां तांबे की प्लेट लगी है। एएसआई की अधीक्षण रसायनविद रंजना पुष्कर ने बताया कि दोनों छतरियों के ऊपर लगी तांबे की छत का केमिकल ट्रीटमेंट किया जाना है। प्रस्ताव दिल्ली भेजा गया है।
31 दिसंबर 1978 को हो गई थी किले में चोरी
48 साल पहले 31 दिसंबर 1978 को आगरा किले में बंगला-ए-रोशनआरा और जहांआरा के ऊपर अष्टधातु की छतरियां, कलश और अन्य चीजें चोरी हो गई थीं। एएसआई के पूर्व इंजीनियर अमरनाथ गुप्ता बताते हैं कि उस समय इसकी कीमत 1.25 करोड़ रुपये आंकी गई थी। उस समय यह देश की सबसे बड़ी और रहस्यमय चोरियों में शुमार थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने सीबीआई को जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई ने तत्कालीन कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ की थी, लेकिन चोरों का खुलासा नहीं हो सका था।
1987 में तांबे की छतरी, कलश ले गए चोर
सीबीआई जांच में खुलासा न होेने पर एएसआई ने यहां तांबे के कलश के साथ छतरी लगाई और उस पर सुनहरी पॉलिश करा दी, लेकिन 1987 में चोर इस बार भी इसे अष्टधातु का समझकर चोरी कर ले गए थे। तत्कालीन संरक्षण सहायक एनके भारद्वाज ने सोने का पानी फिरी तांबे की चादर वाली छत, तीन कलश और तांबे का फव्वारा चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हालांकि, बाद में यह सामान शिवाजी की कथित जेल के पास मिल गया था। वर्ष 1989-90 में इसी तांबे की चादर को तांबे की कीलों से स्थापित किया गया था।
कौन थीं रोशनआरा और जहांआरा
जहांआरा और रोशनआरा मुगल बादशाह शाहजहां की बेटियां थीं। शाहजहां की बेगम मुमताज महल की मृत्यु के बाद जहांआरा ताकतवर हो गईं, वहीं दूसरी बेटी रोशनआरा ने उत्तराधिकार के युद्ध में अपने भाई औरंगजेब का साथ दिया था। किले में उत्तरी दिशा वाला महल जहांआरा का और दक्षिणी दिशा का रोशनआरा के नाम पर है। यह दोनों ही अनूठे हैं और मुगल काल के किसी किले में ऐसी वास्तुकला उपयोग नहीं की गई।