आगरा फोर्ट-लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस डेढ़ माह से निरस्त चल रही थी। बृहस्पतिवार को इसका निरस्तीकरण एक माह और बढ़ा दिया गया। आगरा से लखनऊ के लिए चलने वाली यह ट्रेन अकसर निरस्त कर दी जाती है। छह माह में 85 दिन निरस्त हो चुकी है। अब निरस्तीकरण बढ़ने से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
आगरा फोर्ट-लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस का संचालन शुरू होने पर इसमें लंबी वेटिंग रहती है। ट्रेन से बड़ी संख्या में दैनिक यात्री भी सफर करते थे, लेकिन लगातार निरस्त रहने के कारण अब इनकी संख्या कम हो गई है।
ट्रेन से इटावा ड्यूटी पर जाने वाले नदीम खान बताते हैं कि कोटा पटना एक्सप्रेस में आसानी से आरक्षण नहीं मिल पाता है। यही कारण है कि आगरा से लखनऊ सरकारी कामकाज से जाने वाले लोग इसी गाड़ी से सफर करते हैं। लखनऊ इंटरसिटी जुलाई में टूंडला में चले मरम्मत कार्य के दौरान भी निरस्त कर दी गई थी। छह माह के भीतर अभी तक यह ट्रेन 85 दिन कैंसिल रह चुकी है।
जीएम को पत्र लिखा
रेल परामर्शदात्री समिति के सदस्य राजकुमार शर्मा ने कहा कि आगरा लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस का फरवरी में निरस्तीकरण रद्द करने को जीएम, रेलवे को पत्र लिखकर मांग करेंगे। इस महत्वपूर्ण ट्रेन को अकसर ही निरस्त कर दिया जाता है। लखनऊ रूट पर आगरा से चलने वाली इस गाड़ी को लेकर अकसर ही मनमानी की जाती है।
साल में छह माह चल रही
रेल परामर्शदात्री समिति के सदस्य नरेश पांडेय, सतीश अग्रवाल, रिंकू अग्रवाल, नीतू अग्रवाल का कहना है कि यह गाड़ी साल में छह माह ही चल पाती है। आगरा-लखनऊ इंटरसिटी को अकसर निरस्त करने से लोगों को इसका लाभ ही नहीं मिल पा रहा।
समय में सुधार को बदले स्टेशन
इस गाड़ी की लेटलतीफी को खत्म करने के लिए रेलवे ने इसका राजा मंडी का रूट बदलकर यमुना ब्रिज स्टेशन पर ठहराव किया, लेकिन इसके बाद भी गाड़ी की टाइमिंग में सुधार नहीं आ सका।
आगरा मंडल के डीसीएम एसके श्रीवास्तव ने बताया कि ट्रेन को निरस्त करने के पीछे मरम्मत कार्य या कोहरा कारण होता है। यह निर्णय इलाहाबाद मुख्यालय से होते हैं। अगर ट्रेन को लेकर कोई दिक्कत है तो इस बारे में सदस्य अवगत कराएं, हम मुख्यालय को अवगत कराएंगे।